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कैदी या कंटेंट क्रिएटर ?,, सेंट्रल जेल में मुलाकात के दौरान बनी रील ने खोली पोल,, मस्तूरी गोलीकांड के आरोपियों का सोशल मीडिया में वायरल रील,, जेल सुरक्षा पर बड़ा सवाल ?

बिलासपुर, अप्रैल, 11/2026

कैदी या कंटेंट क्रिएटर ?,, सेंट्रल जेल में मुलाकात के दौरान बनी रील ने खोली पोल,, मस्तूरी गोलीकांड के आरोपियों का सोशल मीडिया में वायरल रील,, जेल सुरक्षा पर बड़ा सवाल ?

बिलासपुर। जिले की सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों में है। मस्तूरी के चर्चित गोलीकांड मामले में बंद आरोपी अब जेल के भीतर से ‘डॉन स्टाइल’ में रील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। इस घटना ने न सिर्फ जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल कर रख दी है।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जेल में बंद मुख्य आरोपी विश्वजीत अनंत और उसके साथियों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह रील जेल परिसर के भीतर से बनाई गई है, जिसमें आरोपियों को दबंग और रसूखदार अंदाज में पेश किया गया है। बताया जा रहा है कि मुलाकात के लिए आए लोगों ने ही इस रील को शूट कर सोशल मीडिया पर वायरल किया।

सवाल यह है कि जेल के भीतर मोबाइल पहुंचा कैसे? और इतनी ‘आज़ादी’ किसके इशारे पर?

गौरतलब है कि करीब 5 महीने पहले मस्तूरी में कांग्रेस नेता और जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह पर उनके ही कार्यालय में फायरिंग की गई थी। इस सनसनीखेज वारदात में युवा कांग्रेस नेता विश्वजीत अनंत और उसके साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। लेकिन अब जेल में बंद ये आरोपी ‘कानून के डर’ की बजाय ‘सोशल मीडिया स्टार’ बनते नजर आ रहे हैं।

वायरल रील 

 

जेल प्रशासन की कार्यवाही या सिर्फ खानापूर्ति?

रील वायरल होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में आरोपियों की मुलाकात पर रोक लगा दी गई है और मुलाकात कक्ष के स्टाफ को हटा दिया गया है। साथ ही रील बनाने वालों पर FIR दर्ज करने और मुलाकातियों की मेटल डिटेक्टर से जांच के निर्देश दिए गए हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब पहले भी जेल में गैंगवार, नशाखोरी और कमीशनखोरी जैसी गंभीर शिकायतें सामने आ चुकी हैं, तो फिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं?

क्या जेल सुधार गृह है या अपराधियों का ‘सुविधा केंद्र’?

वायरल रील ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जेल अब सुधार का स्थान रह गया है या फिर अपराधियों के लिए ‘लक्जरी ज़ोन’ बनता जा रहा है, जहां से वे अपनी ‘दबंग छवि’ का प्रचार कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन जांच करने की बात कह रहा है।

खोमेश मंडावी, अधीक्षक, केंद्रीय जेल बिलासपुर।।

 

 

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