
बिलासपुर // जरा देखिए जंगल विभाग का जंगलराज इस अफ़सर को यक़ीनन नियम-कायदों से कोई सरोकार नहीं होगा, सरकारी वाहन पर पदनाम लिखी हुई बिना नंबर की यह स्कार्पियो आपको शहर, कलेक्टर ऑफिस के अलावा बिलासपुर-कोटा मार्ग पर अक्सर नज़र आ जाएगी। ये वन विभाग की गाड़ी है जिस पर डीएफओ लिखा है, आगे-पीछे छत्तीसगढ़ शासन भी लिखा हुआ है। सरकार के यातायात नियमों को जंगल के किसी कोने में टांगकर बेख़ौफ़ घूमते इस अफसर की नैतिकता और कर्तव्यपरायणता पर भी विचार किया जाना चाहिए। कायदे-कानून की अक्सर दुहाई देने वाले अधिकांश अफ़सर अपने निजी वाहनों पर पदनाम और छत्तीसगढ़ शासन लिखवाकर घूमते हैं। नियमतः ये गलत है लेकिन देखेगा कौन ? कुछ साहबों के बच्चे स्कुल, कोचिंग क्लास और खेल मैदान जाने के लिए सरकारी वाहनों का ड्राइवर सहित इस्तेमाल करते हैं तो कुछ साहबों की मैडमों को बाज़ार की चकाचौंध के बीच सरकारी खर्च पर इतराते-इठलाते देखा जा सकता है। चूँकि बिलासपुर शहर में यातायात नियमों की किताब सिर्फ और सिर्फ आम जनमानस के लिए खोली जाती है। ऐसे में किस वर्दीधारी की हिम्मत है जो किसी अफसर या फिर रसूखदार के वाहन को रोक ले ? वैसे तो बिना नंबर और चंद रूपये के सायरन वाहन में लगाकर गली-मोहल्ले के असामाजिक तत्व भी सड़क पर होंय-होंय करते नज़र आ जायेंगे, ऐसे में वन महकमें का यह अफसर आखिर किस मुग़ालते में सड़क पर फर्राटे भरता है ?

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