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बिलासपुर : वास्तु के हिसाब से बनाया गया ,, यह नया द्वार भी शहर विधायक के काम न आया ,, पहले संसदीय सचिव की नियुक्ति फिर निगम मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में भी शहर विधायक शैलेश पांडे का नंबर नहीं लगा ,,

वास्तु के अनुसार बंगले का दरवाजा पूर्व मुखी करना भी त्वरित लाभ नहीं दे पाया बिलासपुर विधायक को ,,

बिलासपुर // ऐसी पुरानी मान्यता है कि आप किसी कलश या मटकी के ऊपर एक ढक्कन रखकर उसका मुंह बंद कर सकते है.. लेकिन लोगों का मुंह बंद नहीं कर सकते। लिहाजा,पहले संसदीय सचिव की नियुक्ति और उसके बाद निगम मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति में शहर विधायक शैलेश पांडे का नंबर नहीं लगने पर उनके विरोधियों का मुंह खुल गया है। वे यह प्रचारित करने में लगे हैं कि मौजूदा शासन में शहर विधायक का सिक्का उतना नहीं चल रहा है जितना कि चलना चाहिए। इन्हीं विरोधियों के द्वारा शैलेश पांडे के बंगले में पुराना दरवाजा रहते हुए, एक नया पूर्व मुखी दरवाजा बनाने को लेकर कहा जा रहा है कि विधायक पाण्डे के द्वारा वास्तु के हिसाब से यह नया दरवाजा बनाया गया।

दरअसल, वास्तु शास्त्र में दक्षिण मुखी घर को सर्वाधिक निक्कृष्ट और पूर्व मुखी (जिसे छत्तीसगढ़ी में उक्ती मुख के कहां जाता है) घर को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पांडे से खुन्नस रखने वाले लोगों के द्वारा कहा जा रहा है कि उन्होने राजनीति में अपना वजन बढ़ाने के लिए विधायक निवास के बंगले में पहले से पश्चिम मुखी दरवाजा होने के बावजूद एक नया पूर्व मुखी द्वार हाल ही में बनवाया था। लेकिन उसके बावजूद शैलेश पांडे को सियासत में कोई तात्कालिक लाभ नहीं मिला। न तो उन्हे संसदीय सचिव पद पर नियुक्ति मिली और ना ही निगम मंडल अध्यक्षों की सूची में ही उनका नाम शामिल हुआ। मतलब यह कि बिलासपुर विधायक की सियासी कुंडली में उनके बंगले में “नया बना पूर्व मुखी द्वार” भी कोई खास बदलाव नहीं ला पाया। इस बाबत जब विधायक पांडे के नजदीकियों से पूछा गया। तो उनका कहना था पुराने द्वार से शहर विधायक के घर पहुंचने में बिलासपुर के लोगों और शहर की जनता को तकलीफ होती थी। एक लंबा फेरा लगाकर उनके बंगले तक पहुंचना पड़ता था। अब पूर्व दिशा की ओर बने नए द्वार से लोगों के लिए उनके बंगले तक बहुत आसानी हो गया है। उनके नजदीकियों का कहना है कि इस नए पूर्व मुखी दरवाजे का, वास्तु से कोई लेना-देना नहीं है। वरन लोगों की सुविधा को देखते हुए ही यह नया दरवाजा बनाया गया है।

वैसे काफी हद तक यह बात सही भी लगती है। अब राह चलते लोगों को बिना बंगले के भीतर के नए दरवाजे की ओर से बाहर से ही पता लग जाता है कि, शहर विधायक शैलेश पांडे अपने निवास पर है अथवा नहीं..? जबकि इसके पहले पूरा एक चक्कर घूम कर बंगले के पुरानी और इकलौते मुख्य द्वार से बंगले के भीतर जाने के बाद ही पता चल पाता था कि… श्री पांडे बंगले में है….अथवा नहीं..? इस लिहाज से शहर विधायक के बंगले का नया दरवाजा उनसे मिलने आने वाली आम जनता के लिए पुराने द्वार की बनिस्बत काफी सुविधाजनक हो गया है। लेकिन जैसा कि हमने पहले कहा कि आप किसी कलश या मटकी के मुंह में ढक्कन लगाकर उसका मुंह बंद कर सकते हो। लेकिन लोगों का मुंह बंद करना किसी के बस में नहीं है। लिहाजा, उनके विरोधी अब दबी जुबान से यही कह रहे हैं कि, शहर विधायक ने अपना सियासी रुतबा बढ़ाने के लिए वास्तु शास्त्र के हिसाब से बंगले की पूर्व दिशा में नया प्रवेष द्वार बनवाया गया। लेकिन जहां तक प्रदेश में संसदीय सचिव और निगम मंडलों में नियुक्ति मैं अनुकूल ग्रहों और किस्मत की बात है.. बिलासपुर विधायक के निवास में (वास्तु के हिसाब से) बनाया गया… यह नया द्वार भी शहर विधायक के काम न आया।

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