
बिलासपुर // छत्तीसगढ़ में देखा जाए तो प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है प्रदेश में जो भी सीएम रहे हमेशा से खनिज विभाग वो अपने पास ही रखते रहे और रखे भी क्यों ना सबसे मलाईदार विभाग जो है, शायद यही कारण है कि राज्य में सीएम ने कभी किसी और मंत्री को खनिज विभाग नही दिया गया है चाहे वो पूर्व सीएम रमन सिंह हो या वर्तमान में भूपेश बघेल सरकार किसी की भी हो पर हमेशा से इन प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ दोहन ही होता रहा है और अवैध उत्खनन करने वाले माफियाओं की वजह से धरती का सीना चीरकर प्रकृति और सरकार दोनों को नुकसान पहुंचाने का कार्य किया जाता रहा है और वर्तमान में भी यही हो रहा है प्रदेश हो या जिला जगह जगह अवैध उत्खनन जोरो पर चल रहा है, ऐसा नही हैं कि इसकी जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को नही है पर छोटी मोटी कार्यवाही कर विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। क्योंकि ज्यादातर अवैध खुदाई सत्ता से जुड़े लोग ही कर रहे है। जिले का खनिज विभाग अवैध उत्खनन रोकने में लगातार कोरम पूरा करने वाली कार्रवाइयों को दिखाकर विभाग के अधिकारी सिर्फ अपनी पीठ थपथपाते हैं.. लेकिन माफियाओं को रोकने में अब तक सफल नहीं हो पाए हैं..

आपको बतादे की बिलासपुर शहर से लगे ग्राम पंचायत सेमरताल में इन दिनों सरपंच और ठेकेदार की आपसी साँठगाँठ से बिना अनुमति खुलेआम मुरुम की अवैध खुदाई की जा रही है। रोजाना 10 से 15 ट्रक मुरुम निकाल कर बिना रायल्टी के बेची जा रहीं है,जिससे सरकार को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। जबकि पूरे प्रदेश में मुरुम खुदाई पर रोक लगी हुई है.. जिले में गौण खनिजों के अवैध खनन का यह कोई नया मामला नहीं है.. अवैध रेत खनन के साथ-साथ मुरूम और अन्य गौण खनिजों की चोरी का सिलसिला लंबे समय से जारी है। सेमरताल ग्राम पंचायत में तालाब के आसपास लाखों का गौण खनिज चोरी करने वाले खुलकर खनन कर रहे हैं। वहीं जब अधिकारियों से इस विषय पर चर्चा की जाती है तो उनका हमेशा की तरह एक ही जवाब रहता है कि उन्हें कुछ पता नहीं है, सूचना मिलने पर कार्यवाही की जाएगी।

इस पूरे मामले में सेमरताल के सरपंच राजेन्द्र साहू से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि मुरुम खुदाई के लिए ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पास किया गया है, और मुरुम को ग्राम पंचायत क्षेत्र में ही उपयोग करना है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि मुझे इसके बारे में कुछ भी नही पता आप खनिज विभाग से बात करिए उनसे कार्यवाही के लिए कहिये मैं कुछ नही जानता कहते हुए उन्होंने फोन बंद कर दिया। वही मौके पर मौजूद ठेकेदार के कर्मचारी ने बताया कि मुरुम का उपयोग हाइवे सड़क के उपयोग के लिए भेजीं जा रही है। जिसकी रायल्टी पर्ची नही ली गयींहै।
वही खनिज अधिकारी दिनेश मिश्रा का कहना है कि सूचना मिलने पर अवैध उत्खनन पर कार्यवाही की जाती है। मुरुम,रेत की 17 गाड़ियों पर रतनपुर से बिल्हा तक कार्यवाही की गई है। ये कहना गलत है कि विभाग कार्यवाही नही करता है। जहाँ सूचना मिलती है, तत्काल भेजी कार्यवाही की जाती है बस देखना ये होता है कि उनके पास अनुमति है या नही क्योंकि कुछ जगहों में हमने अनुमति दी है।
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