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131 दिन का धरना, उबलता जनाक्रोश: लिंगियाडीह में ‘छत बचाओ’ संग्राम, निगम पर तानाशाही के आरोप…

बिलासपुर, मार्च, 31/2026

131 दिन का धरना, उबलता जनाक्रोश: लिंगियाडीह में ‘छत बचाओ’ संग्राम, निगम पर तानाशाही के आरोप…

बिलासपुर। न्यायधानी के लिंगियाडीह क्षेत्र में पिछले 131 दिनों से जारी धरना आंदोलन अब जनाक्रोश में तब्दील होता जा रहा है। नगर निगम की तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ गरीब तबके के लोग खासतौर पर महिलाएं कड़ी धूप, गर्मी और खुले आसमान के नीचे अपने आशियाने को बचाने के लिए डटे हुए हैं। हालात यह हैं कि यह आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।

लिंगियाडीह में कई मकानों पर पहले ही बुलडोजर चल चुका है, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं। वहीं शेष घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। अपने सिर की छत बचाने के लिए महिलाएं, बच्चे और पुरुष लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इससे क्षेत्रवासियों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

राजनीतिक रूप से भी यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश में ‘सुशासन’ का दावा करने वाली सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि सत्ता पक्ष से होने के बावजूद, निगम की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष के नेताओं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हैं, ने आंदोलन को समर्थन दिया है। इसके बावजूद प्रशासन अपने रुख पर अडिग नजर आ रहा है।

निगम अधिकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर तोड़फोड़ की गई है, वहां फिलहाल किसी निर्माण का प्रस्ताव नहीं है। लेकिन इसी के साथ आगे भी कार्रवाई की तैयारी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर निगम किसके इशारे पर काम कर रहा है और क्या इस कार्रवाई के पीछे कोई दबाव है ? स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के इशारे पर निगम प्रशासन बस्तियों को उजाड़ने की साजिश रच रहा है।

बड़ा सवाल…

जब जमीन पर कोई निर्माण प्रस्ताव नहीं, तो फिर तोड़फोड़ क्यों?

क्या यह प्रशासनिक कार्रवाई है या राजनीतिक दबाव का परिणाम?

लिंगियाडीह का यह आंदोलन अब सत्ता और व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor

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