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“नारायणा स्कूल पर घोटाले के आरोप, अब कोर्ट में होगा फैसला!” एनएसयूआई ने दी न्यायालय जाने की चेतावनी, छात्रों और अभिभावकों को न्याय दिलाने की तैयारी तेज

बिलासपुर, मार्च, 27/2026

“नारायणा स्कूल पर घोटाले के आरोप, अब कोर्ट में होगा फैसला!”

एनएसयूआई ने दी न्यायालय जाने की चेतावनी, छात्रों और अभिभावकों को न्याय दिलाने की तैयारी तेज

बिलासपुर। शहर के नारायणा टेक्नोक्रेट स्कूल की कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। छात्रों और अभिभावकों को न्याय दिलाने के लिए एनएसयूआई (राष्ट्रीय छात्र संघ) ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यदि स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों की जमा राशि वापस नहीं की और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो वे जल्द ही अदालत में याचिका दायर करेंगे।

गुरुवार को युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने सिविल लाइन थाने में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने मोटी फीस वसूलकर अभिभावकों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया है, वहीं बच्चों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ हुआ है।

सीबीएसई से भी होगी शिकायत…

एनएसयूआई ने साफ किया कि वे मामले को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि सीबीएसई मुख्यालय भुवनेश्वर में भी शिकायत दर्ज कराएंगे। संगठन ने सवाल उठाया है कि आखिर किस आधार पर स्कूल को संबद्धता (अफीलिएशन) दी गई, जबकि प्रबंधन पर पहले से ही सीबीएसई के नाम का दुरुपयोग कर लाखों रुपये वसूलने के आरोप हैं।

फीस और खातों में गड़बड़ी के आरोप…

संगठन ने स्कूल की वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि:

विद्यालय द्वारा वसूली गई फीस का लेखा-जोखा स्थानीय (बिलासपुर) खाते में नहीं रखा जा रहा।

फीस की राशि बाहरी राज्यों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है।

यदि स्कूल अचानक बंद होता है, तो अभिभावकों के लिए अपने पैसे वापस पाना मुश्किल हो सकता है।

एनएसयूआई का कहना है कि सीबीएसई और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार प्रत्येक शाखा का स्थानीय बैंक खाता होना अनिवार्य है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। इसके बावजूद पिछले सत्र (2024-25, 2025-26) और आगामी सत्र (2026-27) की फीस बाहरी खातों में स्थानांतरित करना गंभीर अनियमितता है।

प्रवेश प्रक्रिया पर भी सवाल…

संगठन ने यह भी बताया कि स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया सितंबर 2024 से ही शुरू कर दी गई थी, जबकि विद्यालय का संचालन अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ। इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए एनएसयूआई ने इसे अभिभावकों को भ्रमित करने की साजिश बताया है।

संघर्ष जारी रखने की चेतावनी…

एनएसयूआई नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक अभिभावकों की पूरी राशि वापस नहीं होती और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी संस्था इस तरह की “हिमाकत” करने की हिम्मत न कर सके।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बुधवार को भी एनएसयूआई ने स्कूल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक शामिल हुए थे। अब देखना होगा कि यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर न्यायालय में एक बड़ी कानूनी लड़ाई का रूप लेता है।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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