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अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का सबसे बड़ा भंडाफोड़: 11वीं मंजिल से चलता था फर्जी कॉल सेंटर, 100 से ज्यादा हिरासत में 14 घंटे चली छापेमारी, भारी मात्रा में सर्वर-कंप्यूटर जब्त,, विदेशी लिंक और हवाला नेटवर्क की जांच शुरू…

बिलासपुर, जुलाई, 02/2026

लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का सबसे बड़ा भंडाफोड़: 11वीं मंजिल से चलता था फर्जी कॉल सेंटर, 100 से ज्यादा हिरासत में

14 घंटे चली छापेमारी, भारी मात्रा में सर्वर-कंप्यूटर जब्त,, विदेशी लिंक और हवाला नेटवर्क की जांच शुरू…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। शहर की चर्चित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर संचालित हो रहे फर्जी कॉल सेंटर पर मंगलवार देर रात शुरू हुई कार्रवाई बुधवार दोपहर तक करीब 14 घंटे चली। इस दौरान पुलिस ने 100 से अधिक कर्मचारियों को हिरासत में लिया, जिनमें लगभग 20 युवतियां भी शामिल हैं। सभी को कस्टडी में लेने के लिए पुलिस को मौके पर तीन बसें बुलानी पड़ीं।

वर्ष 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी एवं एडीसीपी क्राइम किरण यादव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, हाई-एंड सर्वर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर विदेशों में बैठे सरगनाओं के निर्देश पर संचालित किया जा रहा था।

 

अमेजन और बड़ी कंपनियों के नाम पर ठगी

जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह अमेजन जैसी प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियों के फर्जी कस्टमर सपोर्ट और रिफंड विभाग के नाम पर विदेशी नागरिकों को कॉल करता था। उन्हें रिफंड, अकाउंट सिक्योरिटी, तकनीकी खराबी या बैंकिंग समस्या का झांसा देकर कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लिया जाता था। इसके बाद बैंक खातों और कार्ड संबंधी जानकारी हासिल कर लाखों-करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

पुलिस को आशंका है कि गिरोह अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के नागरिकों को निशाना बनाता था। इसके लिए प्रशिक्षित कॉल एजेंट अंग्रेजी में बातचीत कर लोगों का विश्वास जीतते थे।

विदेशी कनेक्शन और हवाला एंगल की जांच पुलिस अब गिरोह के विदेशी संचालकों, फर्जी बैंक खातों, शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क की जांच में जुट गई है। साइबर विशेषज्ञ जब्त किए गए सर्वर और डिजिटल डिवाइस का फॉरेंसिक परीक्षण कर रहे हैं, ताकि ठगी के वास्तविक नेटवर्क, पीड़ितों की संख्या और लेन-देन का पता लगाया जा सके।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि गिरोह का संबंध अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट से तो नहीं है। यदि विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पुष्टि होती है तो केंद्रीय एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार हिरासत में लिए गए कर्मचारियों से पूछताछ जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि कौन कर्मचारी सिर्फ नौकरी कर रहा था और कौन लोग ठगी की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। जांच के आधार पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में अब तक के सबसे बड़े साइबर कॉल सेंटर रैकेट के खुलासों में से एक माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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