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ऑनलाइन पेमेंट के बदले नकद देने का खेल, 45 च्वाइस सेंटर संचालकों से 25 लाख की धोखाधड़ी.. QR कोड बना ठगी का हथियार, रायपुर के दो आरोपी गिरफ्तार..

बिलासपुर, अक्टूबर, 14/2026

ऑनलाइन पेमेंट के बदले नकद देने का खेल, 45 च्वाइस सेंटर संचालकों से 25 लाख की धोखाधड़ी..

QR कोड बना ठगी का हथियार, रायपुर के दो आरोपी गिरफ्तार..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में च्वाइस सेंटर संचालकों के QR कोड का दुरुपयोग कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का थाना रेंज साइबर बिलासपुर ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में रायपुर निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर बिलासपुर सहित प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाने का आरोप है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, धोखाधड़ी की कुल रकम लगभग 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

फोन-पे ट्रांजेक्शन के बदले नकद देने का झांसा

पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत बिलासपुर जिले के बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक की शिकायत से हुई। देवेंद्र ने पुलिस को बताया कि 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से उनके सेंटर पहुंचा। उसने खुद को फोन-पे के माध्यम से होने वाले लेन-देन से जुड़ा बताते हुए कहा कि ऑनलाइन रकम के बदले उसे नकद राशि दे दी जाए।

सेंटर संचालक के सहमत होने पर आरोपी ने उनके सेंटर के QR कोड की तस्वीर अपने मोबाइल में ले ली और वहां से चला गया। इसके बाद QR कोड का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपये की रकम निकाल ली गई। बाद में संबंधित लेन-देन के कारण संचालक के बैंक खाते पर होल्ड लग गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते में आए फोन-पे ट्रांजेक्शन का संबंध साइबर फ्रॉड से है।

इसके बाद च्वाइस सेंटर संचालकों के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से देवेंद्र को जानकारी मिली कि इसी तरीके से अन्य संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी की गई है। शिकायत के आधार पर थाना रेंज साइबर बिलासपुर में अपराध क्रमांक 05/2026 के तहत धारा 318(4), 317(4) और 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

QR कोड की तस्वीर भेजता था एक आरोपी, दूसरा करता था ट्रांजेक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। पुलिस बिलासपुर क्षेत्र में आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान आरोपी अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा इसी तरह की वारदात को अंजाम देने के प्रयास में घूमता मिला। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर धोखाधड़ी करना स्वीकार किया।

पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी मिलकर इस वारदात को अंजाम देते थे। अंकित आहूजा अलग-अलग च्वाइस सेंटर और सीएससी सेंटरों में पहुंचकर वहां के QR कोड की तस्वीर अपने मोबाइल से साथी आशीष केवटवानी को भेजता था। इसके बाद आशीष QR कोड स्कैन कर रकम ट्रांसफर करता था। वहीं, अंकित सेंटर संचालक से नकद राशि लेकर वहां से निकल जाता था। बाद में जब संचालकों के बैंक खातों पर होल्ड लगता था, तब उन्हें पता चलता था कि उनके खातों में आया पैसा साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।

नौ जिलों में फैला था ठगी का नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के च्वाइस सेंटर संचालकों को भी निशाना बनाया। अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन प्राप्त होने की जानकारी पुलिस ने दी है। इनके आधार पर धोखाधड़ी की कुल रकम 20 से 25 लाख रुपये के बीच होने का अनुमान है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित आहूजा (32), निवासी कमल विहार, रायपुर और आशीष केवटवानी (32), निवासी महावीर नगर, रायपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 1,02,000 रुपये नकद, एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

साइबर ठगी की रकम आने से खाते हो रहे थे होल्ड

इस मामले में च्वाइस सेंटर संचालकों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ा। आरोपियों के झांसे में आकर नकद रकम देने के बाद जब उनके बैंक खातों में साइबर अपराध से जुड़ी राशि आने का पता चला, तो खातों पर होल्ड लगने लगा। इससे संचालकों को आर्थिक नुकसान के साथ बैंकिंग संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।

पुलिस की इस कार्रवाई में थाना प्रभारी रेंज साइबर बिलासपुर प्रसाद सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अशोक कश्यप, आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस मामले में आगे की विवेचना कर रही है।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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