बिलासपुर, जून, 30/2026
आरोप और सस्पेंशन… नगर निगम के हाई-प्रोफाइल विवाद ने फिर पकड़ा तूल,, 1.15 करोड़ के आरोपों वाला VIDEO वायरल… मामला फिर सुर्खियों में…
वायरल वीडियो से मचा बवाल, पूर्व संपदा अधिकारी निलंबित; पूर्व महापौर ने आरोपों को बताया साजिश, उच्च स्तरीय जांच समिति गठित
बिलासपुर। दो वर्ष पुराने एक वीडियो ने बिलासपुर नगर निगम के बहुचर्चित टेंडर विवाद को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन द्वारा पूर्व महापौर रामशरण यादव पर 1 करोड़ 15 लाख रुपये के कथित लेन-देन का आरोप लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो के वायरल होते ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और निगम प्रशासन भी हरकत में आ गया है।
मामले की सबसे अहम बात यह है कि वीडियो में सामने आए कथित आरोपों के बीच तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने स्वयं इन दावों से दूरी बना ली है। उनका कहना है कि उनके नाम से फर्जी शिकायत तैयार की गई, वीडियो को एडिट कर भ्रामक तरीके से सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया और इस पूरे घटनाक्रम के जरिए उन्हें ब्लैकमेल कर 50 लाख रुपये की मांग की गई। देवांगन का दावा है कि वायरल सामग्री वास्तविक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है।
राजेश देवांगन, पूर्व संपदा अधिकारी…
दूसरी ओर, पूर्व महापौर रामशरण यादव ने भी अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि संबंधित मामले की पहले भी जांच हो चुकी है और किसी भी स्तर पर आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है और वे झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
रामशरण यादव, पूर्व महापौर
वायरल वीडियो के बाद नगर निगम प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। निगम प्रशासन का कहना है कि विवादित टेंडर पहले ही निरस्त किया जा चुका था। अब समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
खजांची कुमार, अपर आयुक्त/निगम अधिकारी…
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वीडियो और आरोप सही हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी है? यदि शिकायत फर्जी और वीडियो एडिटेड है तो इसे तैयार कर वायरल करने के पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था? क्या ब्लैकमेलिंग के दावे सही हैं या फिर यह पूरे विवाद का एक नया पक्ष है? इन तमाम सवालों के जवाब फिलहाल जांच समिति की रिपोर्ट पर निर्भर हैं।
फिलहाल इतना तय है कि दो साल पुराने इस वीडियो ने एक बार फिर नगर निगम के पुराने विवाद को जीवित कर दिया है। गंभीर आरोप, फर्जी शिकायत, ब्लैकमेलिंग के दावे और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।
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