बिलासपुर, जुलाई, 24/2025
रिवर व्यू संकट में : सुकून से हुड़दंग तक का सफर… रफ्तार, अश्लीलता से खोती मर्यादा, बिगड़ती छवि…
– विशेष संपादकीय
शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जहाँ लोग राहत की साँस लेते हैं, परिवार के साथ समय बिताते हैं, बच्चों की मुस्कान देखते हैं, और खुद को प्रकृति के करीब पाते हैं। बिलासपुर का रिवर व्यू भी ऐसा ही एक स्थान है। लेकिन विडंबना देखिए कि वही रिवर व्यू अब बेतहाशा रफ़्तार, स्टंटबाज़ी, और अश्लीलता का पर्याय बनता जा रहा है।
शाम होते ही रिवर व्यू का माहौल बदलने लगता है। तेज़ रफ्तार बाइकें, ऊँची आवाज़ में बजते स्पीकर, और लड़कों के झुंड जिनका उद्देश्य सैर नहीं, बल्कि दिखावा, बवाल और ‘वायरल वीडियो’ बनाना होता है। ये न सिर्फ ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हैं, बल्कि उस सार्वजनिक मर्यादा को भी ठेंगा दिखाते हैं, जो किसी भी सभ्य समाज की नींव होती है।
हाल ही में वायरल हुए वीडियो—जिनमें स्टंट के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से की जा रही अश्लील हरकतें भी शामिल हैं ने इस जगह की छवि पर गहरा धब्बा लगाया है। प्रश्न यह नहीं कि ये घटनाएँ हो क्यों रही हैं, बल्कि यह है कि होने दी क्यों जा रही हैं ?
प्रशासन ने औपचारिक कार्रवाई करते हुए कुछ पर जुर्माना लगाया है, पर क्या यह पर्याप्त है ? क्या इससे कोई फर्क पड़ा है ? जब तक यह कार्रवाई केवल ‘दिखावे’ तक सीमित रहेगी और गश्त केवल कैमरे की मौजूदगी में होगी, तब तक स्थिति सुधरने की उम्मीद करना एक भ्रम ही होगा।
स्टंट करते वीडियो वायरल
समस्या केवल पुलिस की नहीं है…
यह गिरती व्यवस्था सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि समाज के एक वर्ग की बढ़ती संवेदनहीनता का भी प्रमाण है। यह दर्शाता है कि अब हमें न केवल व्यवस्था को सुधारने की ज़रूरत है, बल्कि मानसिकता को भी।
रिवर व्यू जैसे सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक ज़िम्मेदारी की आवश्यकता है। प्रशासन की भूमिका अहम है, लेकिन समाज की जागरूकता उससे कम नहीं। स्थानीय नागरिकों को चाहिए कि वे इन घटनाओं के खिलाफ आवाज़ उठाएँ, प्रशासन से संवाद करें और यदि ज़रूरत हो तो वीडियो साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कर कड़ी कार्रवाई की माँग करें।
कपल्स का रिवरव्यू में अश्लीलता…
क्या यह वही रिवर व्यू है जिसकी कभी प्रशंसा की जाती थी ?
शहर की शान कही जाने वाली यह जगह अब असहजता और असुरक्षा का कारण बन गई है। परिवारों ने यहाँ आना कम कर दिया है। महिलाओं के लिए यह स्थान अब उतना सुरक्षित नहीं रहा। यह किसी स्थान विशेष की नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई है। समय रहते संभलना ज़रूरी है।
प्रशासन को चाहिए कि
पुलिस की पेट्रोलिंग लगातार होती रहे, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी मॉनिटरिंग हो, स्टंटबाज़ी और अश्लीलता करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो, और यदि आवश्यक हो तो रात के समय आवाजाही पर कुछ हद तक नियंत्रण भी लागू किया जाए।
एक शहर की पहचान उसके स्मारकों से नहीं, उसके आचरण और सार्वजनिक स्थलों की गरिमा से होती है। रिवर व्यू को बचाना केवल एक पार्क को बचाना नहीं, बल्कि शहर की संस्कृति, प्रतिष्ठा और नागरिकों की सुरक्षा को बचाना है।
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