बिलासपुर, जुलाई, 27/2026
सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा: समाजसेवी ने की तहसीलदार-एसडीएम को भी आरोपी बनाने की मांग…
इधर लिपिकों की गिरफ्तारी से नाराज राजस्व लिपिक संघ ने खोला मोर्चा,,, अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी चेतावनी…
बिलासपुर। सर्पदंश और प्राकृतिक आपदा सहायता राशि के नाम पर कथित फर्जी मुआवजा वितरण का मामला अब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं रह गया है। तीन राजस्व लिपिकों और एक महिला चिकित्सक की गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस बीच समाजसेवी रशीद बख्श ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने और जांच प्रक्रिया में शामिल रहे तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) को भी आरोपी बनाए जाने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पिछले कई वर्षों से जिले में अन्य कारणों से हुई मौतों को सर्पदंश से हुई मौत दर्शाकर शासन से करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि निकाली गई। इस कथित फर्जीवाड़े में मेडिकल दस्तावेज तैयार कराए गए और बाद में उसी आधार पर सहायता राशि स्वीकृत की गई। समाजसेवी का कहना है कि मुआवजा जारी करने से पहले तहसीलदार और एसडीएम द्वारा जांच की जाती है, इसलिए उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। केवल छोटे कर्मचारियों को आरोपी बनाना न्यायसंगत नहीं है।
समाजसेवी रशीद बक्स
इधर, तीन राजस्व लिपिकों की गिरफ्तारी के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ भी खुलकर सामने आ गया है। संघ ने संभागायुक्त, आईजी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा, चयनात्मक और कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत बताया है। संघ का कहना है कि राजस्व लिपिक केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं, जबकि पंचनामा, पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों एवं विभागों की होती है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के नाम पर वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। न्यायालयीन शाखा में कार्यरत रीडरों से भी अपराधियों की तरह पूछताछ की जा रही है, जो न्यायिक गरिमा के विपरीत है। कर्मचारियों ने दावा किया कि एक कर्मचारी को उसके पिता के निधन के बाद भी पूछताछ के लिए बुलाया गया।
राजस्व लिपिक संघ ने पहले तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की थी, लेकिन कलेक्टर द्वारा विभागीय जांच कराने और हाई पावर कमेटी गठित करने के आश्वासन के बाद फिलहाल हड़ताल स्थगित कर दी गई है। हालांकि संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर समिति का गठन कर विभागीय जांच शुरू नहीं की गई तो जिलेभर के राजस्व कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस जांच के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर समाजसेवी न्यायिक जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्व कर्मचारी निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम और जांच की दिशा पर टिकी हुई हैं।

Author Profile
Latest entries
राजनीति08/10/2026निर्वाचन आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट घेरकर उठाई मुख्य चुनाव आयोग के इस्तीफे की मांग…
बिलासपुर08/10/2026सेलर में सीमांकन कार्रवाई बना राजनीतिक अखाड़ा, सरपंच ने राजस्व विभाग की कार्रवाई पर उठाए सवाल, पॉलिटिकल दबाव में जमीन की जांच का आरोप,सभी खसरों की निष्पक्ष की मांग..
बिलासपुर08/10/2026रोटरी क्लब ऑफ बिलासपुर यूनाइटेड ने 140 बच्चों को वितरित किए स्कूल बैग एवं लंच बॉक्स..
राजनीति06/10/2026आयोजन में अरपांचल याद, विकास में क्यों भुला दिया ?अलग नगर निगम की मांग पर चुप्पी क्यों साधे है जिम्मेदार ? बारिश में जलभराव, सालों से विकास का इंतजार… अरपांचल को अलग नगर निगम कब ?… विजय केशरवानी !
