
बिलासपुर // सकरी उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार अभिषेक राठौर ने पहले कोटवारी जमीन पर बनाई गई कच्ची सड़क को खुदवाया और अब उसे पटवा भी दिया है। इससे साफ जाहिर है कि नायब तहसीलदार राठौर के हाथ भू-माफिया के आगे बंधे हुए हैं। चर्चा यह भी है कि भू-माफिया से गुपचुप तरीके से सड़क का दाम लेकर कोटवारी जमीन से रास्ता दे दिया गया है।

आपको बतादें की सकरी निवासी कोटवार गायत्री मानिकपुरी पति प्रदीप मानिकपुरी ने 5 मार्च 2019 कलेक्टर कार्यालय में एक शिकायत की थी, जिसमें बताया गया था कि उसके नाम पर पटवारी हल्का नंबर 45 में खसरा नंबर 310/4, 310/6 व 311/1 में कोटवारी जमीन है। उसकी जमीन मुख्य सड़क से लगी हुई। मुख्य सड़क से 100 मीटर दूर वंदना जिज्ञासी की जमीन है, जिस पर वह प्लाटिंग कर रही है। उसके प्लाट तक जाने के लिए कहीं से कोई रास्ता नहीं है। सकरी के तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार ने बिल्डर को लाभ पहुंचाने के लिए कोटवारी जमीन से 30 बाई 100 का रास्ता दे दिया है, जबकि इसकी अनुमति उससे नहीं ली गई है। इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने शिकायत शाखा प्रभारी को जांच कराने का आदेश दिया। शिकायत शाखा के प्रभारी अधिकारी डिप्टी कलेक्टर ने 8 अप्रैल 2019 को कोटा एसडीएम को पत्र लिखकर एक सप्ताह में जांच कर प्रतिवेदन मांगा था। कोटा एसडीएम ने 7 मई 2019 को सकरी के नायब तहसीलदार अभिषेक राठौर को एक पत्र जारी किया, जिसमें कोटवारी जमीन में बनाए गए रास्ते के संबंध में दो दिन के अंदर जानकारी मांगी गई।
कोटवारी जमीन पर रास्ते की शिकायत मिलते ही नायब तहसीलदार राठौर ने जांच शुरू की। शिकायतकर्ता गायत्री बाई और बिल्डर का बयान लिया। शिकायत सही पाए जाने पर नायब तहसीलदार ने सड़क को बीच से खुदवा दिया, तब पीड़ित महिला को लगा कि उसे अब न्याय मिल गया है, लेकिन उसे क्या पता था कि वही तहसीलदार बाद में बिल्डर से मिलीभगत कर रास्ता फिर खुलवा देंगे और हुआ भी यही। जेसीबी से खोदी गई सड़क को दो महीने के बाद पटवा दिया गया और वहां से फिर आवागमन शुरू कर दिया गया है। अब यहां दावे के साथ यह कहा जा सकता है कि नायब तहसीलदार की सहमति के बिना बिल्डर में इतनी हिम्मत नहीं कि वह फिर से रास्ता खोल ले। जाहिर है, पूर्व में पदस्थ रहे अतिरिक्त तहसीलदार की तरह नायब तहसीलदार अभिषेक राठौर के भी गहरे रिश्ते बिल्डर से बन गए होंगे। अब ये रिश्ते कैसे बने होंगे और याराना के लिए दोनों के हाथों में कितने रंग घुले होंगे, ये तो नायब तहसीलदार और बिल्डर ही अच्छे से बता पाएंगे। इस मामले में पक्ष जानने के लिए नायब तहसीलदार राठौर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन लगातार रिंग जाने के बाद उन्होंने मोबाइल कॉल रिसीव नहीं किया।
उप तहसील सकरी अंतर्गत किन किन पटवारी हल्का नंबरों और गांव में नायाब तहसीलदार अभिषेक राठौर की मौन सहमति से रहो रही है अवैध प्लाटिंग का अगले अंक में अवैध प्लाटिंग करने वालो के नाम और खसरा नंबर सहित मामले का करेंगे खुलासा…. पढ़ते रहिये NEWSLOOK.IN ……!
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