बिलासपुर // दिवाली के त्यौहार में हर पटाखों के धुएं से ध्रूम्र प्रदूषण बढ़ जाता है। इस बार यह धुआं कोरोना संक्रमितों के लिए घातक हो सकता है। इसे देखते हुए बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वह पटाखों की दिवाली की जगह दियों की दिवाली मनाएं। लोगों के सहयोग से न सिर्फ धूम्र प्रदूषण कम होगा बल्कि कोरोना संक्रमण को रोकने में भी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग के जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. मनोज सैम्युअल का कहना है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके वे लोग जो फेफड़े और शरीर में कमजोरी तथा अस्थमा व एलर्जी से पीड़ित हैं, उनको पटाखों के धुएं से यथासंभव दूरी बनाने का प्रयास करना चाहिए, ऐसे लोगों के लिए पटाखे का धुआं बहुत खतरनाक हो सकता है। आमतौर पर रोशनी का त्यौहार दिवाली अपने साथ बहुत सारी खुशियां लेकर आता है, लेकिन अस्थमा या एलर्जी पीड़ित मरीजों की समस्या इन दिनों अपेक्षाकृत बढ़ जाती है। डॉक्टर मानते हैं कि पटाखों के धुएं से फेफड़ों में सूजन आ सकती है, जिससे फेफड़े अपना काम ठीक से नहीं कर पाते और हालात यहां तक भी पहुंच सकते हैं कि ऑर्गेन फेलियर और मौत तक हो सकती है, इसलिए धुएं से बचने की कोशिश करना चाहिए। पटाखों के धुएं की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है। ऐसे में जिन लोगों को सांस की समस्याएं हो, उन्हें अपने आप को प्रदूषित हवा से बचा कर रखना चाहिए।
इस संबंध में बिलासपुर सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन ने बताया, कोरोना संक्रमित, कोरोना संक्रमण पश्चात स्वस्थ हो चुके तथा अस्थमा-एलर्जी के मरीजों की सेहत के लिए पटाखे का धुआं खतरनाक हो सकता है। ऐसे लोगों को दिवाली की आतिशबाजी या पटाखों के धुएं से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी रहें सतर्क…
डॉक्टरों का कहना कि बच्चे और गर्भवती महिलाओं को भी पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहना चाहिए। पटाखों से निकला गाढ़ा धुआं खासतौर पर छोटे बच्चों में सांस की समस्याएं पैदा करता है। पटाखों में हानिकारक रसायन के कारण बच्चों के शरीर में टॉक्सिन्स का स्तर बढ़ जाता है, जिससे उनके विकास में बाधा आने लगती है। पटाखों के धुएं से गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को भी ऐसे समय में घर पर ही रहना चाहिए।
हवा में ऐसे घुलता है प्रदूषण…
पटाखे के धुएं अथवा आतिशबाजी के कारण हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है। धूल के कणों पर कॉपर, जिंक, सोडियम, लैड, मैग्निशियम, कैडमियम, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जमा हो जाते हैं। इन गैसों के हानिकारक प्रभाव होते हैं। इसमें कॉपर से सांस की समस्याएं, कैडमियम-खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम करता है। जिंक की वजह से उल्टी व बुखार व लेड से तंत्रिका प्रणाली को नुकसान पहुंचता है। मैग्निशियम व सोडियम भी सेहत के लिए हानिकारक है।
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