बिलासपुर, नवंबर, 25/2025
लिंगियाडीह में महिलाओं का सांकेतिक धरना, कहा “मकान तोड़कर कॉम्प्लेक्स नहीं बनने देंगे!”… पूर्व विधायक शैलेश पांडे धरने में शामिल…
बिलासपुर। लिंगियाडीह क्षेत्र में नगर-निगम की संभावित तोड़फोड़ कार्रवाई और जमीन के उपयोग को लेकर महिलाओं का आक्रोश उभरकर सामने आया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलाएँ सड़क पर उतरीं और सांकेतिक धरना देकर नगर-निगम के खिलाफ विरोध जताया। इस आंदोलन को बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेश पांडे भी पहुंचे और महिलाओं की मांगों का समर्थन किया।
धरने पर बैठी महिलाओं का आरोप है कि नगर-निगम उनके घरों को तोड़कर उस भूमि पर गार्डन और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाना चाहती है। महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से इस भूमि पर निवास कर रही हैं और निगम की कार्रवाई गरीबों के निवास के अधिकार पर सीधा हमला है।

“सिर्फ सर्वे किया गया, कोई प्रस्ताव नहीं” — नगर-निगम
वहीं नगर-निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में सिर्फ सर्वे कार्य कराया गया है। गार्डन अथवा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स निर्माण का कोई आधिकारिक प्रस्ताव अभी तक पारित नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं में गलतफहमी फैलाई जा रही है।
महिलाओं की मांग: तोड़फोड़ रोकी जाए, उसी स्थान पर पट्टा दिया जाए
धरना दे रही महिलाओं और रहवासियों ने स्पष्ट मांग रखी है।
नगर-निगम कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, गार्डन निर्माण एवं तोड़फोड़ की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाए।
उनसे 10 रुपये प्रति वर्गफुट के प्रीमियम पर राशि ली गई है, इसलिए उसी स्थान पर उन्हें पट्टा दिया जाए।
मोपका, खमतराई, मंगला, बहतराई आदि क्षेत्रों की तरह लिंगियाडीह के वासियों को भी इसी नियम के तहत पट्टा वितरण किया जाए।

राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत सर्वे, पर पट्टा आज तक नहीं
रहवासियों ने बताया कि रायपुर अटल नगर के निर्देश दिनांक 01-10-25 और कलेक्टर आदेश क्रमांक 235/भू.अ./2019 के आधार पर साल 2019 में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत सर्वे कर 505 हितग्राही परिवारों की सूची तैयार की गई थी।
लेकिन छह साल बाद भी इनमें से किसी को पट्टा नहीं दिया गया, जिससे लोगों में गहरा असंतोष है।
मार्च 2025 में 150 से अधिक मकान-दुकान तोड़े, अब भी अनिश्चितता
स्थानीय लोगों ने बताया कि मार्च 2025 में नगर-निगम ने कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और गार्डन निर्माण के नाम पर 150 से अधिक मकान और दुकानें तोड़ी थीं। उनका कहना है कि यदि विकास कार्य करना था तो उसे उसी स्थान पर बनाया जाता, लेकिन लगातार विस्थापन गरीबों के साथ अन्याय है।
रहवासियों ने यह भी कहा कि संबंधित भूमि मास्टर प्लान के अनुसार आवासीय क्षेत्र में आती है, ऐसे में गरीबों के घर तोड़कर कॉम्प्लेक्स या गार्डन बनाना पूरी तरह अनुचित है।

“हम अपने घर नहीं उजड़ने देंगे” — महिलाओं का ऐलान
धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि वे किसी भी स्थिति में अपने घरों को उजड़ने नहीं देंगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो वे उग्र आंदोलन करने को भी तैयार हैं।
पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने कहा कि गरीबों के घर उजाड़कर विकास नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने और लोगों को राहत देने की मांग की।
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