बिलासपुर, फरवरी, 05/2026
बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव रद्द: बिना सुनवाई फैसले पर बवाल, रजिस्ट्रार–सहायक पंजीयक के खिलाफ विजिलेंस जांच की मांग…CM से लेकर लोकायुक्त तक शिकायत…
बिलासपुर। 19 सितंबर को बिलासपुर प्रेस क्लब के विधिसम्मत हुए चुनाव को एकतरफा निरस्त किए जाने का मामला अब प्रशासनिक गलियारों में गरमा गया है। सहायक पंजीयक और रजिस्ट्रार की बिना सुनवाई कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव रद्द करने से प्रभावित प्रेस क्लब सदस्यों ने इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर की मनमानी करार दिया है। मामले में विजिलेंस एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर कलेक्टर के माध्यम से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और लोकायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया।
कलेक्टर संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपते हुए प्रभावित पत्रकारों ने बताया कि 19 सितंबर 2025 को प्रेस क्लब का चुनाव पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार संपन्न हुआ था। सदस्यों की भागीदारी से निर्वाचित नई कार्यकारिणी ने विधिवत कार्यभार भी संभाल लिया था। इसके बावजूद दो माह बाद अचानक 18 नवंबर को फर्म एवं संस्थाएं रायपुर छत्तीसगढ़ की रजिस्ट्रार पद्मिनी भोई ने चुनाव को निरस्त कर दिया, जिससे सदस्यों में आक्रोश है। चुनाव रद्द करने से प्रभावित पदाधिकारियों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक जनादेश को कुचलने जैसा कदम है।
ज्ञापन में बताया गया है कि रजिस्ट्रार ने 18 नवंबर 2025 को चुनाव रद्द करने का आदेश पारित कर दिया, जबकि संबंधित पक्षों को नोटिस चार दिन बाद 24 नवंबर को जारी किया गया। यानी सुनवाई से पहले ही फैसला सुना दिया गया। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन बताया गया है।
सहायक पंजीयक पर अधिकार क्षेत्र से बाहर हस्तक्षेप के आरोप…
ज्ञापन में सहायक पंजीयक ज्ञान पी साहू पर धारा 32(ख) के आवेदन को अधिकार क्षेत्र से बाहर स्वीकार करने, एक-तिहाई सदस्यों के समर्थन और शपथ पत्र के बिना शिकायत लेने, कोरम विहीन आवेदन को मान्य ठहराने तथा बिना वैध इलेक्शन पिटीशन चुनाव प्रक्रिया में दखल देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने अवैधानिक रूप से प्रकरण को रजिस्ट्रार को अग्रेषित किया।
बिना जांच सख्त फैसला, रजिस्ट्रार की भूमिका पर सवाल...
रजिस्ट्रार द्वारा केवल पत्राचार के आधार पर चुनाव निरस्त करने, शिकायत की सत्यता की जांच न करने, साक्ष्य के बिना आदेश पारित करने और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कार्यकारिणी को हटाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पदाधिकारियों ने इसे प्रशासनिक मनमानी और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में बताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस क्लब प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और लोकायुक्त को ज्ञापन सौंपकर विजिलेंस या स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दोषी अधिकारियों पर विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा गया है कि न्याय नहीं मिला तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपे वालो में दिलीप यादव, (अध्यक्ष प्रेस क्लब 19 सितंबर 2025 को हुए चुनाव में) इरशाद अली, (पूर्व अध्यक्ष बिलासपुर प्रेस क्लब) संजीव पांडे, (अध्यक्ष प्रेस क्लब गृह निर्माण समिति) कमलेश शर्मा (पूर्व उपाध्यक्ष प्रेस क्लब)गोपी डे, (उपाध्यक्ष प्रेस क्लब 19 सितंबर 2025 को हुए चुनाव में) लोकेश वाघमारे,(कोषाध्यक्ष, 19 सितंबर 2025 को हुए चुनाव में) रमेश राजपूत (सहसचिव 19 सितंबर 2025 को हुए चुनाव में) वरिष्ठ पत्रकार महेश तिवारी, रवि शुक्ला, श्याम पाठक, जितेंद्र थवाईत, पंकज गुप्ते, अख़लाक खान, मनीष शर्मा, जेपी अग्रवाल, दिब्येंदु सरकार, सतीश मिश्रा, भुवनेश्वर बंजारे, विकास तिवारी, रोशन वैद्य, घनश्याम गंधर्व, प्रांशु क्षत्रिय, उदय सिंह, निशांत तिवारी शाहिद अली सहित बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल थे।
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