बिलासपुर, मई, 07/2026
एफएसएल रिपोर्ट से लेकर टीआई परेड तक सवालों में,, नक्सली हमला ताड़मेटला केस में आरोपी बरी…76 जवान हुए थे शहीद…
हाईकोर्ट ने सरकार की अपील खारिज की, कहा– शक नहीं, ठोस प्रमाण चाहिए…
बिलासपुर। वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपियों की बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा है। इस हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि जांच एजेंसियां आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और कानूनी रूप से मजबूत सबूत पेश करने में नाकाम रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल शक या संदेह के आधार पर किसी को दोषी ठहराकर सजा नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान जांच प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां पाई। फैसले में कहा गया कि एफएसएल रिपोर्ट, टीआई परेड और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। यही वजह रही कि अभियोजन पक्ष अदालत में आरोप साबित करने में सफल नहीं हो सका।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार को बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं, ताड़मेटला हमले जैसे संवेदनशील मामले में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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