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बिलासपुर में बेखौफ अवैध निर्माण! बिना अनुमति तीसरी मंजिल का निर्माण,, शासकीय जमीन पर भी दुकानें ? निगम की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित? मुख्य मार्ग पर नियमों की खुलेआम अनदेखी, जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…

बिलासपुर, अगस्त, 07/2026

बिलासपुर में बेखौफ अवैध निर्माण! बिना अनुमति तीसरी मंजिल का निर्माण,, शासकीय जमीन पर भी दुकानें ?

निगम की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित? मुख्य मार्ग पर नियमों की खुलेआम अनदेखी, जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…

बिलासपुर। शहर में नगर पालिक निगम की अनुमति के बिना निर्माण कराने वालों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों तक कई जगहों पर कथित तौर पर बिना अनुमति निर्माण का काम जारी है। आरोप है कि निगम प्रशासन की कार्रवाई नोटिस जारी करने तक ही सीमित रह जाती है और उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। ऐसा ही एक मामला मंगला चौक से उसलापुर जाने वाले मुख्य मार्ग पर सामने आया है, जहां दाऊ श्री मेडिकल स्टोर के दो मंजिला भवन के ऊपर कथित तौर पर बिना अनुमति तीसरी मंजिल का निर्माण कराया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, उक्त भवन में पहले से दो मंजिल का निर्माण है और वर्तमान में भवन मालिक द्वारा तीसरी मंजिल का निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि इस निर्माण के लिए नगर पालिक निगम बिलासपुर अथवा संबंधित जोन कार्यालय से किसी प्रकार की लिखित भवन निर्माण अनुमति नहीं ली गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य खुलेआम जारी है।

मुख्य मार्ग पर स्थित इस भवन के पीछे की ओर भी जरूरत से अधिक निर्माण किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, भवन में पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं छोड़े जाने का भी आरोप है। व्यस्त मुख्य मार्ग पर स्थित व्यावसायिक भवन में पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से भविष्य में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

मामला सिर्फ तीसरी मंजिल के कथित अवैध निर्माण तक ही सीमित नहीं है। भवन के बाजू में सड़क के आगे-पीछे तीन दुकानें भी बनी हुई हैं, जिनके शासकीय भूमि पर निर्मित होने का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह जमीन मिनोचा कॉलोनी के सामने बनी नई सड़क के निर्माण के दौरान छोड़ी गई भूमि का हिस्सा है। ऐसे में शासकीय भूमि पर हुए निर्माण की स्थिति और उसके दस्तावेजों की जांच की जरूरत है।

अधिकारियों को जानकारी है, मौखिक अनुमति मिली है…

इस पूरे मामले में भवन मालिक का कहना है कि निर्माण की जानकारी निगम कार्यालय के अधिकारियों को दी गई है। उनका दावा है कि अधिकारियों ने मौखिक रूप से निर्माण करने की बात कही है और बाद में निर्माण का नियमितीकरण कराने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, अब तक किसी प्रकार की लिखित अनुमति सामने नहीं आई है। साथ ही भवन मालिक द्वारा निगम में निर्माण अनुमति के लिए आवेदन किए जाने की जानकारी भी नहीं है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निर्माण के लिए नियमानुसार अनुमति आवश्यक है, तो क्या निगम के अधिकारी मौखिक रूप से निर्माण की अनुमति दे सकते हैं? यदि ऐसा नहीं है तो फिर बिना लिखित अनुमति के निर्माण कार्य किसके संरक्षण में जारी है ?

इस मामले में नगर निगम आयुक्त ने कहा है कि मामला संज्ञान में आया है। शिकायत के आधार पर संबंधित भवन मालिक को नोटिस जारी किया जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शहर में अवैध निर्माण के मामलों को लेकर निगम की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में नोटिस जारी करने के बाद आगे की कार्रवाई नहीं की जाती। यदि ऐसा ही चलता रहा तो अवैध निर्माण करने वालों के हौसले और बढ़ने की आशंका है।

अब देखना होगा कि निगम प्रशासन इस मामले में सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूर्ति करता है या फिर बिना अनुमति निर्माण और कथित शासकीय भूमि पर हुए निर्माण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कार्रवाई भी करता है।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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