बिलासपुर, अक्टूबर, 27/2026
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का धरना प्रदर्शन..
नियमितीकरण, वेतन वृद्धि सहित सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति, पेंशन, ग्रेच्युटी और पीएफ की सुविधा देने की भी मांग..
बिलासपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विभागीय सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के निराकरण की मांग की है। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि, पदोन्नति और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग प्रमुखता से उठाई है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का कहना है कि वे लंबे समय से विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कई मूलभूत सुविधाओं और लाभों से वंचित रहना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। विभागीय कार्यों के अलावा भी उनसे कई अन्य काम लिए जाते हैं, जिससे नियमित विभागीय जिम्मेदारियों के निर्वहन में परेशानी आती है।
भारती मिश्रा, जिलाध्यक्ष, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका संघ
नियमितीकरण होने तक 30 हजार रुपये मानदेय की मांग
ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने नियमितीकरण की मांग करते हुए कहा है कि जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता, तब तक श्रम कानूनों के तहत कार्यकर्ताओं को 30 हजार रुपये और सहायिकाओं को 25,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर सीधे पदोन्नति देने तथा पदोन्नति में उम्र की सीमा समाप्त करने की मांग की गई है।
साधना बैसवाड़े, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
पेंशन, ग्रेच्युटी और बीमा का मिले लाभ
कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। ज्ञापन में कहा गया है कि किसी कार्यकर्ता या सहायिका की आकस्मिक मृत्यु होने पर उनके परिवार के सदस्य को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। वहीं, सेवानिवृत्ति के समय कार्यकर्ताओं को 5 लाख रुपये और सहायिकाओं को 3 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की मांग की गई है।
हर साल एक हजार रुपये मानदेय बढ़ाने की मांग

ज्ञापन में मध्यप्रदेश की तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये की वृद्धि करने की मांग भी शामिल है। कार्यकर्ताओं ने शासन से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर लंबित मांगों का निराकरण करने की अपील की है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का कहना है कि वे आर्थिक और मानसिक परेशानियों के बीच काम कर रही हैं। ऐसे में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना जरूरी है, ताकि उन्हें बेहतर कार्य परिस्थितियां और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
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