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पंडवानी की अमर आवाज़ हुई मौन: पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन,, कला जगत में शोक की लहर…

बिलासपुर, जुलाई, 05/2026

पंडवानी की अमर आवाज़ हुई मौन: पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में निधन,, कला जगत में शोक की लहर…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली महान पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का रविवार सुबह रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। लंबे समय से फेफड़ों के संक्रमण सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं और पिछले कुछ समय से अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विदेश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी लोकगायन की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी ओजस्वी आवाज़, सशक्त अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली के माध्यम से जीवंत रूप दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने देश-विदेश के दर्शकों को भारतीय लोककला की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। उन्होंने अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का गौरव बढ़ाया और पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई।

अपने लंबे कलात्मक जीवन में उन्होंने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उनकी कला साधना लोक परंपरा, भारतीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं, कलाकारों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें भारतीय लोककला की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान में से एक को खो दिया है। उनकी आवाज़ भले ही अब हमेशा के लिए शांत हो गई हो, लेकिन पंडवानी के माध्यम से सुनाई गई महाभारत की अमर गाथाएं और उनका अद्वितीय कला-सफर हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा। भारतीय लोककला के इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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