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विद्यार्थी जीवन में खेल से बड़ा दोस्त कोई नहीं: यादव…  आदिवासी छात्रावास मैदान में आयोजित तीन दिवसीय खेल प्रतियोगिता में शामिल हुए महापौर…

विद्यार्थी जीवन में खेल से बड़ा दोस्त कोई नहीं: यादव… आदिवासी छात्रावास मैदान में आयोजित तीन दिवसीय खेल प्रतियोगिता में शामिल हुए महापौर…

बिलासपुर, दिसंबर, 03/2022

विद्यार्थी जीवन में खेल का बड़ा महत्व है। इस जीवन में खेल से बड़ा कोई दोस्त नहीं है। अगर मैदान से किसी की दोस्ती हो गई तो उसे फिर कोई और दोस्त बनाने की जरूरत नहीं पड़ती है। ये बातें महापौर रामशरण यादव ने शनिवार को जरहाभाठा आदिवासी छात्रावास मैदान में आयोजित तीन दिवसीय ख्ोल प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि की आसंदी से कहीं। उन्होंने कहा कि एक कहावत है, 1०० दवा की एक दवा, वह है सुबह की हवा। जो भी सुबह मैदान में आ जाता है, वह कभी भी बीमार नहीं पड़ता। इसलिए सभी को सुबह उठकर मैदान में पहुंच जाना चाहिए। मेयर ने कहा कि हर चीज को प्रतियोगिता की दृष्टि से देखना चाहिए। चाहे जीवन का सफर हो। नौकरी का क्षेत्र हो या फिर कोई क्षेत्र। उसे प्रतियोगिता की तरह मेहनत कर जीतना चाहिए। स्पर्धा में भाग लेने से किसी की हार या किसी की जीत होती है। इसलिए उससे डरने की जरूरत नहीं है। जो हारता है, वही जीतता है।

उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे पिछले समय 2०14 में महापौर का चुनाव हार गए थे। आज जीतकर वे महापौर के रूप में खड़े हैं। इसलिए हार से ज्यादा दुखी होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जीतने वाले को भी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आने वाले समय में उस जीत को बरकरार रखने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में एल्डरमैन काशी रात्रे, एमआईसी सदस्य अजय यादव, पार्षद अजय यादव, रामप्रकाश साहू, एसके लहरे, रामेश्वर, अधीक्षक प्रेस राय, भारती मैडम, भारद्बाज, मनीष पैकरा, अनुराधा ध्रुव, नयन तिवारी आदि मौजूद रहे।

1984 के छात्र जीवन में पहुंच गया था…

मेयर श्री यादव ने कहा कि जब उन्हें स्पर्धा में आने के लिए निमंत्रण देने रामेश्वर जी आए थे, तब बातों ही बातों में वे अपने 1984 के छात्र जीवन में चले गए थे। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में यहां के किसी भी विद्यार्थी को अपने पैनल में लेने में कोई कामयाब हो गया तो उसी दिन से उस पैनल की जीत हो जाती थी। उस समय भी इस छात्रावास में आता रहा हूं। आज मुझे ऐसा लग रहा है कि फिर मेरा बचपन लौट आया है। फर्क इतना है कि पहले मैं छात्र नेता बनकर आता था और आज एक जनप्रतिनिधि बनकर आया हूं।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor

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