अगर तानाशाही इच्छाशक्ति से भी भारत व्यसन मुक्त बने तो कोई गुरेज नहीं ! अगर देश में नोटबंदी और देशबंदी हो सकती है तो नशाबंदी क्यों नहीं? – मिशन स्वराज मंच….
रायपुर // मिशन स्वराज के मंच पर शनिवार को आयोजित चर्चा का विषय था ‘महात्मा गाँधी का व्यसन मुक्त भारत का सपना’ जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से विभिन्न क्षेत्रों के नामी-गिरामी वक्ताओं ने शिरकत की।
मिशन स्वराज के संस्थापक और समाजसेवी प्रकाशपुंज पांडेय ने इस संदर्भ में मीडिया को अवगत कराया कि आज की इस चर्चा में कई नामचीन हस्तियों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए जिसमें दिल्ली से देश के चिरपरिचित वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया सरकार / द वेब रेडियो के सीईओ और lauk.in के फाउंडर अनुरंजन झा, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत, यवतमाल (महाराष्ट्र) से जांबुवंत राव धोटे की सुपुत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महिला विभाग की यवतमाल जिले की अध्यक्षा, अधिवक्ता क्रांति धोटे राउत, छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और भाजपा के दिग्गज नेता डॉ नंद कुमार साय, रायपुर से छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार और चिंतक बाबूलाल शर्मा और रायपुर से अधिवक्ता दुर्गा शंकर सिंह शामिल रहे।
सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि देश में सोशल मीडिया पर देशवासी जिस तरह से आपस में लड़ रहे हैं वो बेहद दुखद है और सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। साथ ही समाज को नशीले पदार्थों का सेवन ही नहीं बल्कि अहंकार जैसे व्यसन से भी मुक्त होना चाहिए।
अनुरंजन झा ने बहुत ही सटीक रूप से समझाया कि नशा कैसा भी हो वो खत्म होना चाहिए वर्ना भारत की आज़ादी के सौ साल पूरे होते-होते हम पुन: गुलाम हो जाएंगे और इस बार हम पर व्यसन का राज होगा।
क्रांति धोटे राउत ने कहा कि शराब से घर बर्बाद होते हैं इसलिए देश में संपूर्ण शराबबंदी होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वे महाराष्ट्र में पूर्ण रूप से नशा बंदी करने के लिए उनकी पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार से बात करेंगी।
डॉ नंद कुमार साय जिन्होंने २३ सिंतबर १९७० को शराब मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए नमक का परित्याग कर दिया था उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार का व्यसन नहीं होना चाहिए ये समाज के लिए बहुत ही खतरनाक है। साथ ही अहंकार जैसे व्यसन का भी समाज को परित्याग करने की अत्यधिक आवश्यकता क्योंकि रावण जैसा विद्वान ब्राह्मण भी अहंकार के व्यसन के कारण मारा है।
बाबूलाल शर्मा ने कहा कि गांधी जी की सोच थी कि अगर शराब और अन्य व्यसनों पर पाबंदी लगाने के लिए मुझे एक तानाशाह भी बनना पड़े तो मंजूर है। उन्होंने कहा कि गांधी जी सोचते थे कि अगर शिक्षा और शराबबंदी में से किसी एक को चुनना पड़ा तो वे शराबबंदी को चुनेंगे।
प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि गांधी जी का मानना था कि शराब मनुष्य की आत्मा का नाश करती है और धीरे-धीरे उसे पशु बना देती है। शराबबंदी और अन्य व्यसनों पर रोक लगाने के लिए सरकारों को मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है और नशाबंदी के लिए अगर तानाशाह बनना पड़े तो वो भी स्वीकार है। अगर देश में नोटबंदी और देशबंदी हो सकती है तो नशाबंदी क्यों नहीं?
अंत में सभी अतिथि वक्ताओं ने इस पहल की तारीफ की कि ऐसी चर्चाएँ देश में निरंतर होती रहनी चाहिए। प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने सबका आभार प्रकट किया और कहा कि अगली चर्चा किसान और सरकारी नीति पर होगी।
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