फर्जी पति बनाकर एस ई सी एल सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा में नौकरी हासिल करने का आरोप ,,

फर्जी पति बनाकर एस ई सी एल सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा में नौकरी हासिल करने का आरोप ,,

एस ई सी एल मुख्यालय में इसके पूर्व भी अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर अलग अलग लोगो ने पहले भी कई तरह की कर चुके है शिकायतें ,,

ऐसे मामलों में सिर्फ जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है नही होती कोई कार्यवाही ,,

कोरबा // स्वर्गीय सदानंद उईके पिता स्वर्गीय धर्मलाल उईके एसईसीएल के सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा कार्मिक 19/334 में पदस्थ थे।जिनकी मृत्यु उनके सेवाकाल के दौरान दिनांक 1 मई 2019 को हो गई। जानकारी के अनुसार स्वर्गीय सदानंद ऊईके अविवाहित थे, इनका ना कोई सामाजिक विवाह हुआ था और ना ही प्रेम विवाह। नियमानुसार मृत्यु उपरांत अनुकंपा नौकरी उत्तराधिकारी या आश्रित परिवार को मिलना था, किंतु आश्चर्य है कि बिना जांच परख किए चंपदेवी माली को अनुकंपा नौकरी दे दी गई। चंपादेवी माली पिता रघुवीर प्रसाद पूर्व से ही विवाहिता हैं, जिनका पति आज भी जीवित है। चंपादेवी से संबंधित न्यायालय से पूर्व पति से विवाह विच्छेद तथा आवश्यक दस्तावेज का होना अति आवश्यक था। प्रथम दृश्यया प्रतीत होता है कि अनुकंपा नियुक्ति, नियम विरुद्ध कूट रचित तरीके से हुई है, जिसमें विभाग की मिली भगत होने का संदेह होता है। चंपादेवी माली का सदानंद उईके के परिवार से दूर-दूर से कोई संबंध नहीं है। फिर विभाग ने किसी गैर की पत्नी को बिना जांच परख के अनुकंपा नौकरी कैसे मुहैया करा दी एवं षडानन उईके के मृत्यु उपरांत उनके स्वायत्त का देय भुगतान भी विभाग ने चंपादेवी माली को उत्तराधिकारी के बतौर प्रदान कर दिया।

अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर की घोर लापरवाही उजागर ….

सदानंद उईके लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी बीमारी का इलाज अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर मैं चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु 1 मई 2019 को हो गई। किंतु हॉस्पिटल की लापरवाही तो देखिए। डेथ सर्टिफिकेट सदानंल उईके के स्थान पर उनकी बहन संध्या उईके के नाम पर जारी कर दिए। हॉस्पिटल प्रबंधन को यह भी नहीं पता कि मरीज मेल है या फीमेल। संध्या उईके आज भी जीवित है एवं मध्य प्रदेश के जयसिंह नगर हॉस्पिटल में बतौर एन एम नर्स सेवारत हैं। जिसे अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने मृत घोषित कर डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया। यह जांच का विषय है।

महाप्रबंधक सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा ने आंख बंद कर दे दी अनुकंपा नौकरी …

स्वर्गीय सदानंद उईके पिता स्वर्गीय धर्मलाल उईके की बड़ी बहन पद्मावती उईके ने सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा को अपने छोटे भाई स्वर्गीय षडानन उईके की मृत्यु उपरांत अनुकंपा नौकरी एवं उत्तराधिकारी के लिए प्रबंधन को गैर जिम्मेदाराना रवैया के लिए दोषी ठहराते हुए प्रबंधन से स्वायत्त का देय भुगतान एवं स्वर्गीय सदानंद उईके की एकमात्र उत्तराधिकारी माता श्रीमती प्रेमवती उईके पति स्वर्गीय बी एल उईके एवं बहनों को देने एवं चंपादेवी माली की अनुकंपा नियुक्ति को खारिज कर स्वर्गीय सदानंद उईके एवं संबंधित परिवार को उचित मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए प्रबंधन को आवेदन पत्र देकर अवगत कराने पर भी विभाग मौन धारण किया हुआ है। इससे यह प्रतीत होता है कि सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा चंपा देवी माली के साथ मिला हुआ है। विभाग की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं होने पर स्वर्गीय सदानंद उईके का परिवार विधिक तौर पर कोर्ट की शरण में जाने के लिए मजबूर हो रहा है।

इकलौते वारिस की बूढ़ी मां महाप्रबंधक से कर रही न्याय की गुहार ….

स्वर्गीय सदानंद उईके की माता प्रेमवती उईके ने कहा है कि सदानंद उईके की मृत्यु पश्चात उसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। अपने पुत्र के स्वायत्तो का देय भुगतान एवं उत्तराधिकारी केवल प्रेमवती ही हैं। किंतु किन कारणों से चंपादेवी माली की अनुकंपा नियुक्ति कर दी गई..? यह अज्ञात है। प्रेमवती उईके के द्वारा महाप्रबंधक कोरबा को आवेदन स्वरूप बार-बार अवगत कराने पर भी विभाग इनके आवेदनों की अवहेलना की जा रही है। श्रीमती चंपादेवी पिता रघुवीर प्रसाद माली पूर्व से किसी अन्य पुरुष की विवाहित पत्नी रही है तथा उसके पूर्व पति से पुत्र-पुत्री भी हैं। ऐसे में बिना किसी तलाक के मेरे पुत्र स्वर्गीय षडानन उईके एवं चंपादेवी माली के मध्य हुआ विवाह स्वयमेव शून्य है। ऐसी स्थिति में स्वर्गीय षडानन उईके के भूतपूर्व फोरमैन इंचार्ज बाउंड्री शॉप सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा के मृत्यु उपरांत कंपनी के नियम अनुसार बकाया राशि व अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने का अधिकारी चंपादेवी माली नहीं है। ऐसी स्थिति में एकमात्र उतराधिकारी प्रेमवती उईके है। फिर किन कारणों से चंपादेवी माली को उत्तराधिकारी घोषित कर अनुकंपा नियुक्ति दी गई, इस तरह 6 बिंदुओं के माध्यम से विभाग को अवगत कराने हेतु बार बार आवेदन प्रस्तुत किया जा रहा है। किंतु विभाग गंभीरता ना बरतते हुए चंपादेवी माली को अनुकंपा नौकरी मैं बरकरार रखा हुआ है।

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