रोजगार के साथ जल संरक्षण को भी अब बढ़ावा देने की पहल … कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हैण्डवॉश की सुविधा …

बिलासपुर // गांवों में भी अब जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता आने लगी है। लोगों की निस्तारी के साथ ही पशु-पक्षियों, खेती-किसानी और हरियाली के लिये पानी जरूरी है। गांवों में तालाब निर्माण, गहरीकरण और अन्य जल स्त्रोतों के संरक्षण के लिये कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता वाले नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी कार्यक्रम से भी लोगों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरणा मिली है।

ऐसे ही सेमरताल गांव में जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा देने की पहल की गई है। ताकि गांव में जल स्तर बना रहे, इससे लोगों को गर्मी के दिनों में भी पेयजल एवं निस्तार की सुविधा होगी। बिल्हा विकासखंड के लगभग 7 हजार आबादी वाले गांव सेमरताल के सरपंच राजेन्द्र साहू ने बताया कि उनके गांव में मनरेगा के तहत 10 लाख रूपये की लागत से पुरेना तालाब गहरीकरण कार्य किया जा रहा है। वहीं डेढ़ लाख रूपये की लागत से नाला (नहर) गहरीकरण कार्य भी संचालित है। इसके पूर्व 1.87 लाख रूपये की लागत से गांव के गौठान में चारागाह विकसित किया गया है।

गांव में पिछले 7 अप्रैल से सतत् रूप से कार्य संचालित है और जरूरतमंद 600 मजदूर कार्यरत है। तालाब गहरीकरण कार्य में कार्यरत मजदूर गोपाल सिंह, अयोध्या सूर्यवंशी, राजकुमारी यादव एवं चैती सूर्यवंशी ने बताया कि उनके गांव में जब से कार्य प्रारंभ हुआ है, सतत् रूप से चल रहा है। यह कार्य पिछले 4 सप्ताह से चल रहा है और अगले महीने के लगभग 10 तारीख तक चलेगा। उन्हें समय पर मजदूरी भी मिल रहा है। कार्यस्थल पर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये सामाजिक दूरी का पालन भी किया जा रहा है। वहीं कार्यस्थल पर सेनेटाईजर, साबुन और हैंडवाश की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। कार्य पर आने और जाने के समय मजदूर अपना हाथ धुलाई करते हैं। मास्क का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। मजदूर अपने टॉवेल का उपयोग मास्क के तौर पर कर रहे हैं। कार्यस्थल पर पेयजल की भी व्यवस्था है।
उल्लेखनीय है कि बिलासपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 27 अप्रैल 2020 की स्थिति में 1 लाख से अधिक जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें नवगठित जिला गौरेला पेण्ड्रा मरवाही के श्रमिक भी शामिल हैं।

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