पॉलिथीन का पर्याय बना माहुल पत्ता
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पॉलिथीन पर बैन लगाए जाने के पश्चात यह सोचनिय विषय बन गया था कि घर घर में डेली उपयोग में लाए जाने वाले पॉलिथीन का पर्याय आखिर क्या होगा कैसे चलेगा बिना पॉलिथीन का जीवन इस चिंतनीय विषय को लेकर देश प्रदेश व विदेशों में भी कई प्रकार के रिसर्च किए जा रहे हैं परंतु भारत सरकार के एक वन मंडलाधिकारी द्वारा इस विकट और विकराल समस्या का निदान करते हुए प्राकृतिक उपाय खोज निकाला गया है क्या है इस विकट समस्या का उपाय देखिए इस रिपोर्ट में
1.विश्व को निगलने वाला पॉलिथीन
2.देश-विदेश सहित छत्तीसगढ़ में हुआ बैन
3.बिना पॉलीथिन के कैसे होगा हमारा जीवन
4.आखिर क्या होगा इसका पर्याय
छत्तीसगढ़ पूरे विश्व में अपनी आदिवासी सभ्यता और इस सभ्यता के द्वारा सहेज कर रखी गई वन संपदा के नाम से जानी जाती है जब पूरा विश्व पॉलिथीन रूपी रावण से लड़ रहा है तो ऐसे में पूरे विश्व के वैज्ञानिक इसका पर्याय खोजने में माथापच्ची कर रहे हैं

वैज्ञानिकों के अनुसार पॉलिथीन को नष्ट होने में 100 वर्ष का समय लग जाता है और यही कारण है कि इसकी समाप्ति कर इसके जगह लेने के लिए किसी नए चीज का आविष्कार अति आवश्यक था इसी आवश्यकता को देखते हुए भारत सरकार के ऊर्जावान वन अनुसंधान एवं विस्तार वन मंडल के वन मंडलाधिकारी (d.f.o.) मनीष कश्यप द्वारा अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए वन अनुसंधान एवं विस्तार वन मंडल बिलासपुर के सकरी नर्सरी में अथक प्रयासों के पश्चात एक उपाय खोज निकाला है।
अपने रिसर्च में उन्होंने पाया कि प्रकृति ने हमें अथाह चीजों का धनी बनाया है जिसमें वन संपदा संजीवनी के रूप में हमारे सामने है जी हां वन में पाया जाने वाला माहुल पत्ता और आसानी से पाए जाने वाला वैक्स पेपर इन दोनों के प्रयोग से वन अनुसंधान एवं विस्तार वन मंडलाधिकारी मनीष कश्यप ने दोना बनाया है जिसके उपयोग से पॉलिथीन की उपयोगिता से निजात पाया जा सकता है।
बिलासपुर जिले के आई.एफ.एस. जो बिलासपुर में वन अनुसंधान एवं विस्तार वन मंडल में डीएफओ के पद पर पदस्थ हैं इनके अथक प्रयासों से वन विभाग सहित देश व प्रदेश का नाम गौरवान्वित हो रहा है। इसके साथ ही शासन प्रशासन के सभी विभाग इस अविष्कार से लाभान्वित होंगे साथ ही छत्तीसगढ़ के बेरोजगारों को रोजगार का अवसर प्रदान करते छत्तीसगढ़ के वेस्ट पौधे को सर्वश्रेष्ठ पौधा बना देगा । आपको बता दें कि भारतीय वन सेवा के अनुसंधान एवं विस्तार वनमंडलाधिकारी (d.f.o.) मनीष कश्यप द्वारा इससे पहले भी कई रिसर्च किए जा चुके हैं। इसी तरह दोने के आविष्कार के बाद इसका सफल उपयोग भी उनके द्वारा किया जा रहा है बस आवश्यकता है भारत सरकार सहित वैज्ञानिकों द्वारा मनीष कश्यप के इस अविष्कार को अप्रूव करने का।
बरहाल d.f.o. मनीष कश्यप के इस दोने को प्रदेश सहित देश में सराहनीय पहल माना जा रहा है और एक के बाद एक नए व विश्वसनीय आविष्कारों से जिला सहित प्रदेश और प्रदेश सहित देश को गौरवान्वित होने का मौका उनके द्वारा दिया जा रहा है।
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