शशि कोंहेर
बिलासपुर // प्रदेश की न्याय धानी कहे जाने वाले बिलासपुर शहर के आसपास स्थित गांव के सब्जी उत्पादकों का अब यहां कोई माई बाप नहीं रहा। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के मूल निवासी होने के बावजूद इन धरती पुत्रों द्वारा उगाई गई सब्जियों को, बिलासपुर के बृहस्पति बाजार, नेहरू नगर और शनिचरी बाजार सहित अनेक स्थानों में सड़कों पर फेंक कर किसानों का घोर अपमान किया जा रहा है। बिलासपुर,, बिलासा बाई के जमाने से जिले के किसानों का अपना घर रहा है। यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि यहां सब्जी और धान उत्पादक किसानों के सामान को बिचौलियों के द्वारा सड़कों पर फेंक दिया जाएगा और उन्हें अपने सामान की बिक्री के लिए कोई जगह मुहैया नहीं कराई जायेगी। बृहस्पति बाजार से बेलज्जत, बेइज्जत खदेडे जाने के बाद एक महीना आज हो गया है।लेकिन इन किसानों को बिलासपुर में सम्मानजनक सब्जी बेचने की जगह भी मुहैया नहीं कराई गई। बिलासपुर नगर निगम में हाल ही में शामिल हुए अधिकांश गांव, सब्जी उत्पादक किसानों की बहू संख्या वाले ग्राम है। ऐसे में चबूतरे पर बैठकर बिचौलिए का खेल खेलने वाले व्यापारियों को बिलासपुर जिले के किसानों की बेइज्जती करने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। बिलासपुर के बृहस्पति बाजार से शुरू हुआ झगड़ा अब एक तरह से किसान वर्सेस बिलासपुर का रूप लेता जा रहा है। च
बिलासा दाई की इस नगरी के आजू बाजू बसे गांव के सब्जी उत्पादकों को क्या अपनी खुद की सब्जियां बेचने का भी सम्मानजनक हक बिलासपुर के नेता नहीं दिला सकते। ग्रामीण केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें कोई दुकान नहीं चाहिए ना उन्हें कोई चबूतरा चाहिए। वह अपने घर की लाई बोरा फटटी पर बैठकर सस्ते में सब्जियां बेचकर शहरवासियों का भला और अपना भी भला करना चाहते हैं। लेकिन शहर की सभी सब्जी मंडियों में बैठे बिचौलिए, यहां के किसानों को एक बोरे फटटी की जगह भी नहीं दे रहे हैं। जहां बैठकर वह अपनी सब्जियां खुद बेज सकें। क्या बिलासपुर शहर यह तय कर चुका है कि यहां किसानों ग्रामीणों और सब्जी उत्पादकों की जगह बिचौलियों दलालों और व्यापारियों का ही परचम लहराना है। किसानों की यहां कोई सुनवाई नहीं होगी।आज जो स्थिति बिलासपुर में बन रही है वह वाकई शर्मनाक है। यहां के विधायकों, यहां के जनप्रतिनिधियों, पंचायत के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों के नाम से अपनी तिजोरी भरने वाले नेताओं को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।बिलासपुर शहर में बीते 1 महीने से किसानों के साथ खासकर सब्जी उत्पादक किसानों के साथ यहां के नेताओं और प्रशासन के द्वारा जिस तरह दोयम दर्जे का बर्ताव किया जा रहा है, वह बेहद शर्मनाक है। अब यह तय करने का समय आ रहा है कि क्या बिलासपुर में बिचौलियोंऔर स्थानीय जनता का खून पीने वाले लोगों की चलेगी या फिर भूमि पुत्रों को भी बिलासा की इस नगरी में जरा सा सम्मान प्राप्त हो सकेगा। जो जाहिर रूप से अब तक नहीं हो रहा है। उल्टे बिलासपुर शहर से सब्जी उत्पादकों के साथ शुरू हुई लड़ाई में कहीं कोई किसानों के साथ नहीं खड़ा है। ऐसा लगता है कि बिलासपुर में यह ऐलान हो चुका है कि गांव वाले और गांव के किसानों के लिए बिलासपुर में ना तो कोई जगह है और ना तो कोई उम्मीद,और ना ही कोई सम्मान है।
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