बिलासपुर, अप्रैल, 17/2026
धर्म स्वातंत्र कानून को “टारगेटेड लेजिस्लेशन” बताकर हाईकोर्ट में दी चुनौती..
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लागू धर्म स्वातंत्र 2026 को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। क्रिश्चियन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि कानून का उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन को रोकना होना चाहिए, लेकिन इसके प्रावधान और भाषा भेदभावपूर्ण हैं। पॉल ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई है कि अधिनियम में ‘प्रिस्ट/फादर’ और ‘मौलवी’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया गया है, जबकि ‘पंडित’ या अन्य धर्मगुरुओं का जिक्र नहीं है। उनका तर्क है कि इससे यह कानून केवल ईसाई और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाता प्रतीत होता है।
याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन बताया है। उनके अनुसार, राज्य किसी एक वर्ग या धर्म को लक्षित कर कानून नहीं बना सकता और धर्म के आधार पर भेदभाव पूरी तरह निषिद्ध है।
पॉल ने कोर्ट से इस अधिनियम को “टारगेटेड लेजिस्लेशन” करार देते हुए निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, इसलिए किसी भी कानून की भाषा निष्पक्ष और सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जिससे आगे की कानूनी और राजनीतिक दिशा तय होगी।
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