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200 करोड़ का सरकारी अस्पताल,, फिर PPP क्यों ? कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब,, सुपर स्पेशलिटी व कैंसर अस्पताल के संचालन पर उठाए सवाल,, कहा जनता को उद्घाटन नहीं इलाज चाहिए…

बिलासपुर, जुलाई, 01/2026

200 करोड़ का सरकारी अस्पताल,, फिर PPP क्यों ? कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब,, सुपर स्पेशलिटी व कैंसर अस्पताल के संचालन पर उठाए सवाल,, कहा जनता को उद्घाटन नहीं इलाज चाहिए…

डॉक्टरों की भर्ती, PPP की शर्तें और गरीब मरीजों के अधिकार सार्वजनिक करने की मांग…

बिलासपुर। बिलासपुर के कोनी स्थित लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 240 बिस्तरीय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एवं 100 बिस्तरीय कैंसर केयर अस्पताल के संचालन को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी विजय केशरवानी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि जनता के टैक्स के पैसे, सरकारी जमीन और सरकारी संसाधनों से बने अस्पताल को अब पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित करने की तैयारी की जा रही है, जबकि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अस्पताल के निर्माण में उपयोग की गई जमीन, भवन, मशीनें और अन्य संसाधन पूरी तरह सरकारी हैं। ऐसे में सरकार स्पष्ट करे कि जब पूरा ढांचा सरकारी है तो निजी भागीदारी की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है। उनका कहना था कि सरकार बताए कि पीपीपी मॉडल लागू होने के बाद आम मरीजों को ऐसा कौन-सा अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जो सरकारी व्यवस्था में संभव नहीं था, और गरीब, मजदूर, किसान व मध्यम वर्ग के मरीजों के मुफ्त एवं सुलभ इलाज की क्या गारंटी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस अस्पताल का उद्घाटन 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था तथा बाद में मुख्यमंत्री ने भी इसका निरीक्षण किया था। इसके बावजूद डेढ़ वर्ष बाद भी अस्पताल पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सका है। उन्होंने सवाल उठाया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ की भर्ती अब तक क्यों नहीं हो पाई और गंभीर मरीजों को आज भी दूसरे अस्पतालों में रेफर क्यों किया जा रहा है।

प्रेसवार्ता में दावा किया गया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के 10 जून और 26 जून 2026 के शासकीय पत्रों में अस्पताल के संचालन के लिए पीपीपी मॉडल की प्रक्रिया, संशोधित आरएफपी, लाइसेंस एग्रीमेंट, फाइनेंशियल मॉडलिंग तथा टेंडर प्रोसेसिंग कमेटी का उल्लेख है। साथ ही इस प्रक्रिया में परामर्शदाता संस्था KPMG की भूमिका का भी जिक्र किया गया है। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि कंसल्टेंट की नियुक्ति किस उद्देश्य से की गई और पीपीपी मॉडल की सभी शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रहीं।

कांग्रेस ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनता पुराने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि वर्तमान सरकार से वर्तमान व्यवस्था का जवाब चाहती है। यदि अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह संतोषजनक है तो पीपीपी मॉडल की आवश्यकता क्यों पड़ रही है और मरीजों के अधिकारों की गारंटी सार्वजनिक करने में सरकार को क्या परेशानी है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम से जुड़े इस अस्पताल से जनता की भावनाएं जुड़ी हैं। इसलिए अस्पताल में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए तथा इलाज आम आदमी की पहुंच में रहना चाहिए।

कांग्रेस ने अस्पताल को तत्काल पूर्ण क्षमता के साथ शुरू करने, सभी आवश्यक डॉक्टरों, नर्सिंग, पैरामेडिकल एवं तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती करने, आईसीयू, कैथलैब, ऑक्सीजन प्लांट, इमरजेंसी और एंबुलेंस सेवाएं शुरू करने, पीपीपी मॉडल लागू करने से पहले गरीब मरीजों के अधिकारों की लिखित गारंटी देने तथा पीपीपी से जुड़े सभी दस्तावेज और शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की है।

प्रेसवार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह केवल एक अस्पताल का नहीं, बल्कि बिलासपुर की जनता के स्वास्थ्य अधिकार का प्रश्न है। उनका कहना था कि जनता को केवल उद्घाटन नहीं, बल्कि बेहतर इलाज चाहिए और सरकार को पीपीपी मॉडल को लेकर उठ रहे सभी सवालों का स्पष्ट जवाब देना होगा।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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