बिलासपुर, जुलाई, 06/2026
फर्जी डॉक्टर केस में नया विवाद,, अपोलो अस्पताल प्रबंधन को मिली क्लीन चिट पर उठे सवाल… फर्जी डॉक्टर की नियुक्ति पर जिम्मेदारी किसकी ?… पूर्व विस अध्यक्ष के बेटे ने मांगी CBI जांच…
डॉ. प्रदीप शुक्ला बोले— डॉक्टर की फर्जी डिग्री की जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, न्याय के लिए कोर्ट जाएंगे।
बिलासपुर। अपोलो अस्पताल में चर्चित फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन केम की नियुक्ति और उसके इलाज से हुई मौतों के मामले में नया मोड़ आ गया है। थाना सरकंडा में डॉक्टर पर दर्ज अपराध क्रमांक 563/2025 के तहत धारा 420, 466, 468, 471, 304 और 34 भादवि में जांच के बाद पुलिस ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी है। इस फैसले पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. पं. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला के पुत्र डॉ. प्रदीप शुक्ला ने पुलिस जांच पर सवाल खड़े करते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि न्याय नहीं मिलने पर वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
डॉ. प्रदीप शुक्ला का आरोप है कि जिस डॉक्टर की विशेषज्ञ चिकित्सक के रूप में नियुक्ति अपोलो प्रबंधन ने की, उसकी डिग्रियां फर्जी थीं और उसके इलाज के दौरान 27 मरीजों की मौत होने का दावा सामने आया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता स्व. राजेंद्र प्रसाद शुक्ला का भी ऑपरेशन इसी डॉक्टर ने किया था। 2 अगस्त 2006 को एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के लिए अपोलो अस्पताल में भर्ती होने के बाद ऑपरेशन के कुछ दिनों के भीतर उनकी मृत्यु हो गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें आरोपी डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच में सामने आया कि आरोपी के पास बताई गई डीएम कार्डियोलॉजी की डिग्री फर्जी थी और उसका छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीयन भी नहीं था। इसके आधार पर पुलिस ने माना कि उसे एंजियोप्लास्टी करने का अधिकार ही नहीं था। इसी आधार पर डॉक्टर और अपोलो प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और गैर इरादतन हत्या सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया था। हालांकि अब जांच पूरी होने के बाद अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दिए जाने पर पीड़ित पक्ष ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
डॉ. प्रदीप शुक्ला ने कहा कि यदि अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक सावधानी बरती होती तो यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी तरह जिम्मेदार होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट देना समझ से परे है।
डॉ. प्रदीप शुक्ला…
मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य तत्कालीन आईएमए अध्यक्ष डॉ. किरण देवरस की जांच से सामने आया था। जांच में यह दावा किया गया था कि अपोलो के मद्रास हेड ऑफिस को सत्यापन के दौरान डॉक्टर की एमबीबीएस और लंदन की एमआरसीपी डिग्रियों के फर्जी होने की जानकारी पहले ही मिल गई थी, लेकिन इसके बावजूद न तो डॉक्टर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई और न ही पुलिस को समय पर जानकारी दी गई। बताया जाता है कि अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों में केवल आरोपी का बायोडाटा उपलब्ध कराया।
अब इस बहुचर्चित मामले में पुलिस द्वारा अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। डॉ. प्रदीप शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि वे पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, ताकि सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आ सके और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
लीगल एक्सपर्ट व्यू…
इस मामले में हाई कोर्ट के क्रिमिनल एडवोकेट अजय अयाची का कहना हैं कि घटना में अपोलो प्रबंधन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि कोई भी मरीज सीधे किसी डॉक्टर के पास नहीं जाता पहले वो मैनेजमेंट के पास जाएगा फिर वो उन्हें डॉक्टर के पास भेजेंगे। इस मामले में प्रबंधन को क्लीन चिट देना सही नहीं है।
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