बिलासपुर, सितंबर, 13/2026
विधायक के जन्मदिन में सड़क बनी जश्न का मंच, जनता घंटों जाम में हलाकान; यातायात प्रशासन सवालों के घेरे में ?
चोरभट्टी में भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह के जन्मदिन समारोह के दौरान बिलासपुर-कोटा मार्ग पर लगा लंबा जाम, सड़क किनारे समर्थकों की भीड़, स्टेज और वाहनों से यातायात प्रभावित।
बिलासपुर। भाजपा के वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह का जन्मदिन समारोह चोरभट्टी में आम राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन गया। जन्मदिन समारोह के दौरान सड़क किनारे स्टेज लगाकर केक काटने, बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने, आतिशबाजी और वाहनों के सड़क किनारे खड़े होने के कारण बिलासपुर-कोटा मुख्य मार्ग पर करीब एक घंटे से अधिक समय तक यातायात प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ा।
बताया जा रहा है कि विधायक के समर्थक सड़क किनारे जन्मदिन का जश्न मना रहे थे। इस दौरान विधायक ने लोगों को संबोधित भी किया। समर्थकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। स्थिति ऐसी बनी कि कई बसें और अन्य वाहन भी जाम में फंसे रहे। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा।
जाम का असर ऐसे समय देखने को मिला, जब तीज पर्व को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार अपने घरों की ओर लौट रहे थे। छुट्टी का दिन होने के कारण कई लोग परिवार के साथ घूमने निकले थे। लेकिन चोरभट्टी में आयोजित समारोह के कारण इन्हें भी जाम की परेशानी झेलनी पड़ी। सड़क पर घंटों फंसे लोगों के बीच व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली।
देखिए वीडियो
आम जनता पर नियम, VIP कार्यक्रम में छूट क्यों ?
जन्मदिन मनाना किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक सड़क पर स्टेज लगाकर ऐसा आयोजन किया जाना उचित है, जिससे यातायात बाधित हो और आम लोगों को परेशानी उठानी पड़े?
आम नागरिक द्वारा सड़क पर जाम की स्थिति पैदा करने या यातायात बाधित करने पर पुलिस और प्रशासन कार्रवाई करते हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या यही नियम जनप्रतिनिधियों के समर्थकों पर भी लागू होंगे ? क्या सड़क पर कार्यक्रम आयोजित कर यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई करेगी ?
यातायात प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यातायात प्रशासन की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की जानकारी पहले से थी, तो क्या यातायात व्यवस्था के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग और कार्यक्रम के कारण यातायात बाधित होने की स्थिति को रोकने के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
जनप्रतिनिधि जनता के वोट से चुने जाते हैं और उनसे आम लोगों की सुविधा और नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में समर्थकों के उत्साह के कारण यदि आम जनता को घंटों जाम में फंसना पड़े, तो यह निश्चित तौर पर व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि क्या यातायात प्रशासन इस मामले में आम जनता और VIP के लिए एक समान नियम लागू करता है या फिर सड़क पर जाम लगाने के नियम भी हैसियत देखकर बदल जाते हैं?
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