अटल आवास से बेदखल हुई दुखियारी मां जब तीन दिन की बच्ची को लेकर पहुंची कलेक्ट्रेट तो उसका दर्द देख सबकी आंखें नम हो गईं ,,

अटल आवास से बेदखल हुई दुखियारी मां जब तीन दिन की बच्ची को लेकर पहुंची कलेक्ट्रेट तो उसका दर्द देख सबकी आंखें नम हो गईं ,,

बिलासपुर (शशि कोंहेर) // उस दुखियारी मां के पास रहने को जगह नहीं है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि अपने गोद में रखी 3 दिन की बच्ची को लेकर वह आखिर जाए तो जाए कहां…! आम आदमी पार्टी के नेता व अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला उसे लेकर सोमवार की दोपहर को कलेक्टोरेट‌ पहुंचीं और वहां मौजूद एडीएम उइके तथा एसडीएम देवेंद्र पटेल से बच्ची और उसकी मां के लिए आवास की व्यवस्था करने का आग्रह करती रही। बच्ची की मां का कहना था कि उसे यहीं कहीं, कलेक्ट्रेट में ही छांह दे दी जाए.. जिससे उसे इधर-उधर मारे…मारे ना फिरना पड़े.. वह दुखियारी जब अपना दुखड़ा रो रो कर बता रही थी वहां मौजूद पत्रकारों की आंखें भी उसके दर्द को देखकर नम हो गईं..उसका दुख देखकर अधिकारी भी परेशान..वे तत्काल कुछ भी कहने-बताने की स्थिति में नहीं थे…लिहाजा काफी देर तक अनुनय विनय आग्रह और आक्रोश का दौर-दौरा चलता रहा.. आखिरकार प्रशासन आश्वासनों के पुलिंदे से उन्हें समझाने का प्रयास करता रहा.. पहले यह सुना था कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती… उसकी लाठी अंधी भी होती है… लेकिन अब समझ में आ रहा है.. आखिर प्रशासन भी तो गरीबों के लिए ऊपर वाला ही है.. उनसे-सबसे ऊपर.. और उन पर शासन करने वाला.. लिहाजा ऊपर वाले की तरह ही उसकी भी लाठी में..एक तो आवाज नहीं होती.. दूसरे प्रशासनिक लाठी की आंखों पर भी कभी-कभी पट्टी बंध जाया करती है…ओह..!

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