• Sun. Jun 23rd, 2024

News look.in

नज़र हर खबर पर

दूर तक सुनाई देगी बिलासपुर के निगम चुनाव में भाजपा के घुटने टेक आत्मसमर्पण की अनुगूंज…

शशि कोंन्हेर
बिलासपुर // अब बिलासपुर नगर निगम का चुनाव बिना किसी विघ्नबाधा के निपट गया। और इसमे कांग्रेस व महापौर रामशरण यादव और सभापति शेख नजीरुद्दीन ने पहली बार निर्विरोध निर्वाचन का इतिहास रच दिया। और काँग्रेस को मिली इस निर्विरोध निर्वाचन की ऐतिहासिक जीत का श्रेय कांग्रेस की एकजुटता के साथ ही भाजपा के नगरीय निकाय चुनाव के प्रदेश प्रभारी अमर अग्रवाल सहित उन भाजपा नेताओं को भी जाता है जिन्होंने महापौर चुनाव में भाजपा का प्रत्याशी खड़ा नही करने के निर्णय को हरी झंडी दी। इसके लिए जिला भाजपा अध्यक्ष रामदेव कुमावत ने कहा है कि चूंकि जनादेश कांग्रेस के पक्ष में था, कांग्रेस की तुलना में भाजपा के कम पार्षद चुनकर आये हैं इसलिए भाजपा विपक्ष में बैठेगी।। पूछा जा रहा है कि बिलासपुर की तरह क्या भाजपा प्रदेश के उन सभी नगरीय निकायों में मेयर अध्यक्ष और सभापति पद पर अपने प्रत्याशी खड़े नहीं करेगी जहाँ उसके पार्षदों की संख्या कम है। ऐसे में उसे राजनांदगांव जगदलपुर में भी महापौर पद के लिये अपने प्रत्याशी खड़े नहीं करने थे जहां भाजपा के विजयी पार्षदों की संख्या कांग्रेस की तुलना में कम थी। वही रायपुर में भी उसे कांग्रेस को वाकओवर दे देना चाहिए जहाँ भाजपा के पार्षदों की संख्या कांग्रेस की बनिस्बत कम थी। बिलासपुर में कांग्रेस की कुशल रणनीति और भाजपा के नगरीय निकाय चुनावों के प्रदेश प्रभारी अमर अग्रवाल के शहर में भाजपा का कांग्रेस को वाकओवर देने का निर्णय किसी भी भाजपाई को हजम नहीं हो रहा है। कांग्रेस के आगे भाजपा का ऐसा घुटने टेक समर्पण पूरे देश मे कहीं देखने को नही मिलेगा।
अगर संख्या बल की कमी के कारण वाकओवर देने का यह निर्णय चुनाव में संभावित हार के डर से लिया गया है तो ऐसे में देश के 1952 में हुए आम चुनाव के बाद से भाजपा की मातृ संस्था भारतीय जनसंघ कोई चुनाव ही नही लड़ती। क्योकि तब हार की बात तो दूर कांग्रेस के आगे जमानत बचाना भी मुश्किल रहा करता था। मगर उस वक्त भी और भारतीय जनसंघ और बाद में भाजपा हर चुनाव में कांग्रेस को ताल ठोंककर ललकारा करती थी।हालांकि अधिकांश चुनावो में उसकी हार तय रहा करती थी। यह ठीक है कि बिलासपुर नगर निगम के महापौर और सभापति चुनाव में भाजपा की हार 100 फीसदी तय थी। और यह भी की अपनी जुझारू वृत्ति और तेजी से काम करने की अपनी छवि के कारण निर्विरोध महापौर निर्वाचित होने वाले रामशरण यादव व सभापति शेख नजीरुद्दीन भी, निसंदेह इस शानदार जीत के सर्वथा हकदार थे। लेकिन इसी बिना पर भाजपा का इस तरह का घुटने टेक समर्पण उसके आम कार्यकर्ता तो दूर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी पचा नहीं पाएंगे। छत्तीसगढ़ में तैनात पार्टी के संगठन मंत्री क्या इस आत्म समर्पण को सही मानेंगे….?
दरअसल, इस चुनाव में महापौर पद को लेकर जबरदस्त खींचतान के बावजूद कांग्रेस जिस तरह एकता के सूत्र में बंधी रही , उससे यह तय हो गया था कि इस बार निगम चुनाव में कांग्रेस में वैसी गुटबाजी कतई देखने को नही मिलेगी, जिसका लाभ बीजेपी को मिल सके। और बिलासपुर में बीते पंद्रह बीस सालों से इसी गुटबाजी की बुनियाद का लाभ उठाकर कांग्रेस को हरा रहे भाजपा नेताओं को समझ मे आ गया कि इस चुनाव में उंन्हे फूल छाप कांग्रेसी तो नहीं ही मिलेंगे । उल्टे यदि उन्होंने महापौर के चुनाव में अपना प्रत्याशी खड़ा किया तो भाजपा से ही कुछ पंजा छाप भाजपाई क्रॉस वोट वाली बगावत न कर दें। दरअसल भाजपा के बिलासपुरिहा हुक्मरान के इस डर को भी निगम चुनाव में कांग्रेस को वाकओवर देने के पीछे की एक और प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

Author Profile

Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
Latest entries

Related Post

शराब आहाता टेंडर मामला…  सरकार ही शराब बेचेगी और सरकार ही पिलायेगी… शराब का विरोध करने वाले अब पूरे प्रदेश को शराब मय बना रहे है : शैलेश पांडेय…
चुनाव आयोग के अभियान पर केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अटकाया रोड़ा… छात्रावास की लड़कियों को मतदान से रोका… हॉस्टल खाली करने का सुनाया फरमान… जबरिया दे दी छुट्टी… जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी ने मामले की जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने निर्वाचन अधिकारी को लिखा पत्र…
महान संत, समाज सुधारक स्वामी आत्मानंद के नाम से संचालित स्कूल, कॉलेज का नाम बदलेगी भाजपा सरकार… कांग्रेस की मांग बदला ना जाए नाम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed