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हाईकोर्ट के द्वारा पूर्व उप पुलिस अधिक्षक के वेतन को पदोन्नति दिनांक से फिक्स करने दिया आदेश…

हाईकोर्ट के द्वारा पूर्व उप पुलिस अधिक्षक के वेतन को पदोन्नति दिनांक से फिक्स करने दिया आदेश…

सितंबर, 03 / 2021, बिलासपुर

उच्च न्यायालय उच्च में अशोक कुमार शर्मा पूर्व उप पुलिस अधिक्षक ने याचिका प्रस्तुत कर बताया कि यचिकाकर्ता सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पद पर दिनांक 01/06/2001 से पदोन्नति की पात्रता रखता था लेकिन पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के द्वारा उसे लघुशास्ती आरोपित कर पदोन्नति से वंचित कर दिया, जबकि लघुशास्ती आरोपित किये जाने पर पदोन्नति की पात्रता बने रहती है, लेकिन पूर्व उच्च अधिकारियों के द्वारा दीर्घशास्ती मानकर प्रमोशन से वंचित कर दिया, फिर उच्च न्यायालय के आदेश से दिनांक 23/03/2007 को सब इंसपेक्टर से इस्पेक्टर पद पर पदोन्नति दिनांक 01/06/2001 से दिया गया, लेकिन काम नहीं वेतन नहीं के आधार पर वेतन बढ़ोत्तरी नहीं की गई, जबकि यह गलती उच्च अधिकारीयों की थी। अशोक कुमार शर्मा ने उच्च न्यायालय में अपने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से याचिका दायर कर विभिन्न उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांतों को बताया कि उसे पुलिस विभाग द्वारा जानबुझ कर दीर्घशास्ती किया गया। राज्य सरकार के वकील ने अपने जवाब में कहा कि पुलिस द्वारा जारी जी.ओ.पी के अनुसार जिस अधिकारी के खिलाफ अपराधिक प्रकरण या विभागीय जांच से बरी हुआ हो उसे काम नही वेतन नहीं के सिद्धांत पर नोशनल पदोन्नति दी जाती है, इसलिये इन्हें पदोन्नति तो दिया गया किंतु वित्तिय लाभ नही, उच्च न्यायालय में प्रकरण की अंतिम सुनवाई करते हुए न्यायाधीश संजय के अग्रवाल दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात् आदेश दिया कि विभिन्न उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांतो को देखने के पश्चात एवं पुलिस विभाग के जी. ओ.पी के अनुसार याचिकाकर्ता का प्रकरण ऐसा नहीं था कि उसके खिलाफ अपराधिक प्रकरण या विभागीय जांच हो, उसे सिर्फ लघुशास्ती दिया गया जो कि पदोन्नति पर बाधा नही है, अत: पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया जाता है कि याचिकाकर्ता के द्वारा संपूर्ण दस्तावेत के प्रस्तुत करने के पश्चात उस पर उचित निर्णय देकर 01/06/2001 से वित्तिय लाभ दिया जावे।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor

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