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ब्रेकिंग छत्तीसगढ़: झीरम नरसंहार में 13 साल बाद आया फैसला, 10 आरोपियों को फांसी की सजा, लेकिन कई सवाल बाकी, बड़े चेहरों की भूमिका पर उठे सवाल ?.. पीड़ित डॉ. विवेक बाजपेई ने जताई असंतुष्टि, बोले- अधूरे न्याय के खिलाफ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट..

बिलासपुर, सितंबर, 16/2026

ब्रेकिंग छत्तीसगढ़: झीरम नरसंहार में 13 साल बाद आया फैसला, 10 आरोपियों को फांसी की सजा, लेकिन कई सवाल बाकी, बड़े चेहरों की भूमिका पर उठे सवाल ?..

पीड़ित डॉ. विवेक बाजपेई ने जताई असंतुष्टि, बोले- अधूरे न्याय के खिलाफ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम कांड मामले में करीब 13 साल बाद फैसला आया है। एनआईए की विशेष अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। फैसले के बाद जहां पीड़ित पक्षों को कुछ राहत मिली है, वहीं मामले के पीड़ित डॉ. विवेक बाजपेई ने फैसले को अधूरा बताते हुए असंतोष जाहिर किया है।

डॉ. विवेक बाजपेई का कहना है कि झीरम कांड में अभी भी कई बड़े चेहरे कानून के शिकंजे से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि जिन 10 आरोपियों को सजा सुनाई गई है, वे कहीं न कहीं मोहरे की तरह इस्तेमाल किए गए। मामले की पूरी सच्चाई सामने आने और सभी दोषियों को सजा मिलने तक उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि अधूरे फैसले को लेकर वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामले की शुरुआती जांच में 40 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में कई नाम जांच और कार्रवाई के दायरे से बाहर हो गए। उनका यह भी कहना है कि कई पीड़ितों और गवाहों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए। ऐसे में उनका मानना है कि अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होने के बावजूद इसे पूर्ण न्याय नहीं माना जा सकता।

डॉ. विवेक बाजपेई, पीड़ित झीरम कांड 

हालांकि 10 आरोपियों को फांसी की सजा मिलने से पीड़ित परिवारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले से जुड़े लोगों में अभी भी असंतोष और रोष है। फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। झीरम कांड की जांच, आरोपियों और कथित बड़े चेहरों की भूमिका को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम नरसंहार

बता दें कि 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान दरभा घाटी के झीरम में नक्सलियों ने बड़ा हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत सुरक्षा बलों के जवानों और अन्य लोगों की मौत हुई थी। हमले में तत्कालीन कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित महेंद्र कर्मा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल सहित कई लोगों की जान चली गई थी।

झीरम कांड को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक नरसंहारों में गिना जाता है। करीब 13 साल बाद आए इस फैसले ने मामले को एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब पीड़ित पक्ष की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में संभावित अपील पर नजर रहेगी।

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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