बिलासपुर, जून, 17/2026
‘भर्ती नहीं तो भविष्य अंधकारमय’,, गृह विज्ञान को भर्ती सूची में शामिल करने छात्राओं ने डिप्टी सीएम से लगाई गुहार…
महिला शिक्षा से जुड़े विषय की उपेक्षा पर छात्राओं में नाराजगी…
बिलासपुर। शासकीय महाविद्यालयों में गृह विज्ञान विषय के सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पदों पर पिछले छह वर्षों से भर्ती नहीं होने से नाराज बड़ी संख्या में छात्राएं बुधवार को उपमुख्यमंत्री अरुण साव के बिलासपुर स्थित सरकारी आवास पहुंचीं। छात्राओं ने ज्ञापन सौंपकर गृह विज्ञान विषय को प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने और रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती शुरू करने की मांग की।
छात्राओं ने बताया कि इससे पहले भी वे उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग तथा बिलासपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि उच्च शिक्षा विभाग के पत्र क्रमांक F4-9/2021/38-1 दिनांक 25 अक्टूबर 2025 के तहत सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के 700 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए वित्त विभाग से स्वीकृति प्रदान की गई है। हालांकि भर्ती के लिए चिन्हित 15 विषयों में गृह विज्ञान को शामिल नहीं किया गया है, जबकि प्रदेश के अधिकांश महाविद्यालयों में यह विषय संचालित है और बड़ी संख्या में छात्राएं इसका अध्ययन कर रही हैं।
अभ्यर्थियों का दावा है कि जनसूचना अधिकारी, उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2025 तक गृह विज्ञान विषय में 24 पद रिक्त थे, लेकिन इसके बाद पदोन्नति और सेवानिवृत्ति के कारण रिक्त पदों की संख्या बढ़कर लगभग 70 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद विषय के लिए एक भी पद स्वीकृत नहीं किया गया है।
छात्राओं ने बताया कि गृह विज्ञान विषय में अंतिम भर्ती वर्ष 2019 में हुई थी, जिसमें केवल 9 पद शामिल थे। इनमें भी 7 बैकलॉग और मात्र 2 नए पद थे। इसके बाद से कोई भर्ती नहीं होने के कारण राज्य के कई स्नातक और स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती के लिए नेट, सेट या पीएचडी की योग्यता आवश्यक है। हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी यह पात्रता हासिल कर रहे हैं और भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। भर्ती नहीं होने से अनेक योग्य अभ्यर्थी आयु सीमा पार करने की स्थिति में पहुंच गए हैं, जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
छात्राओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत भी गृह विज्ञान विषय की मांग बढ़ी है। यह विषय शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास, स्वरोजगार और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराता है। सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, पाक कला, डायट थेरेपी, बाल विकास और काउंसलिंग जैसे व्यावहारिक विषयों के कारण ग्रामीण और महिला छात्राओं के बीच इसकी विशेष लोकप्रियता है।

अभ्यर्थियों ने सरकार से वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में गृह विज्ञान विषय को शामिल कर रिक्त पदों पर भर्ती करने की मांग करते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और वर्षों से इंतजार कर रहे योग्य युवाओं को अवसर मिल सकेगा। छात्राओं ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान करेगी।
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