बिलासपुर, 04/2025
बारिश ने बिगाड़ी स्मार्ट सिटी की सूरत : सरकंडा से अभिषेक विहार तक पानी-पानी… लोग बोले – ‘निगम प्रशासन सो रहा है…
बिलासपुर। स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले बिलासपुर शहर में मंगलवार शाम से हो रही तेज बारिश ने प्रशासन की पोल खोल दी है। लगातार बारिश से शहर की सड़कों से लेकर मोहल्लों और घरों तक पानी भर गया है। नालों और नालियों की निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नतीजा यह है कि शहरवासी अपने ही घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हैं।
सबसे बुरी स्थिति बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के सरकंडा इलाके की है, जहां वार्डों के ज्यादातर मोहल्लों में पानी भर गया है। बरसाती पानी ने गलियों और घरों को तालाब बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम की लापरवाही के कारण उनका जीना दूभर हो गया है। जरूरी सामान लाने-बाहर निकलने तक में लोग असमर्थ हैं।
जलभराव का वीडियो
इसी तरह निगम वार्ड नंबर 14 स्थित अभिषेक विहार कॉलोनी फेस-01 और 02 में तो हालात और भी भयावह हैं। कई मकानों के अंदर पानी घुस गया है। कॉलोनीवासी आक्रोशित होकर पार्षद पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं किया गया।
स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर इतना पानी भरा हुआ है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शहर में हर साल यही समस्या सामने आती है, तो आखिर निगम प्रशासन सिर्फ बारिश के मौसम में जागता क्यों है?

एक स्थानीय निवासी ने बताया— “हम पूरी रात बाल्टियों से पानी निकालते रहे लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। हर साल यही हाल होता है, लेकिन निगम सिर्फ कागजों में काम करता है।”
एक महिला गृहणी ने गुस्से में कहा— “घर के अंदर तक पानी आ गया है, बच्चों को बैठाने की जगह नहीं बची। हमने पार्षद और निगम को कई बार शिकायत की लेकिन किसी को हमारी फिक्र ही नहीं है।”
बच्चों के अभिभावकों ने कहा— “बच्चों को स्कूल छोड़ना किसी संकट से कम नहीं है। सड़कें तालाब जैसी हो गई हैं। इस हालत में अगर कोई दुर्घटना हो गई तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
एक गुस्साए युवा ने साफ कहा— “स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों खर्च हुए लेकिन हालत पहले से बदतर है। यह स्मार्ट सिटी नहीं, डूबता हुआ शहर है।”

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे। नागरिकों का साफ कहना है कि “स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन हकीकत में शहर का ढांचा बद से बदतर हो गया है।” लोगों का सवाल है कि जब हर साल यही समस्या सामने आती है, तो आखिर निगम प्रशासन समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं करता ?
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