बिलासपुर, जनवरी, 14/2026
राजस्व कार्रवाई या साजिश ?.. करबला में सीमांकन ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी… एकतरफा सीमांकन से राजस्व अमला कटघरे में ?..
बिलासपुर। शहर के करबला कोदू होटल चौक क्षेत्र में भूमि सीमांकन विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक दबाव और भू-माफियाओं के संरक्षण में गलत और एकतरफा सीमांकन किया जा रहा है। विवादित जमीन पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से कश्यप परिवार के कब्जे में बताई जा रही है, बावजूद इसके उसी जमीन का सीमांकन कर प्रशासन ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और प्रभावित कश्यप परिवार का आरोप है कि आरआई और पटवारी मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रहे हैं। दूसरे पक्ष की न तो सुनवाई की जा रही है और न ही उनके दस्तावेजों की जांच। इससे आशंका जताई जा रही है कि सीमांकन की आड़ में किसी अन्य जमीन को यहां “बिठाने” की कोशिश हो रही है। बिलासपुर में पहले भी जमीनों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर देने के आरोप सामने आते रहे हैं, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
50 साल पुरानी रजिस्ट्री, फिर अचानक सीमांकन क्यों?
विवादित क्षेत्र की कई जमीनों की रजिस्ट्री 40–50 वर्ष पूर्व हो चुकी है। वर्षों से लोग यहां घर और दुकान बनाकर रह रहे हैं। ऐसे में स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन इतने वर्षों तक सोता रहा और अब अचानक सीमांकन के नाम पर पूरे इलाके को अस्थिर करने की तैयारी क्यों की जा रही है ? प्रभावित भूमि स्वामियों का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया एकतरफा, नियमविहीन और पूर्वनियोजित है। इसमें भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं, जमीन दलालों और राजस्व अमले की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
एक ही परिवार, सात खातेदार—नोटिस सिर्फ एक को
जुना बिलासपुर निवासी शिव प्रताप साव द्वारा खसरा नं. 275/2 के सीमांकन के लिए आवेदन दिया गया था। सोमवार को जब राजस्व टीम करबला पहुंची, तो जिस जमीन का सीमांकन किया गया वह कश्यप परिवार की निकली। इस जमीन में सात खातेदार हैं, जिनके खसरा नंबर अलग-अलग हैं, लेकिन नोटिस केवल अखिलेश कश्यप को दिया गया।उमेश कश्यप और नीलम कश्यप को कोई सूचना नहीं दी गई, जो प्रशासनिक लापरवाही या फिर किसी गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
दर्ज खसरा विवरण
खसरा नं. 279/2 (0.610 हे.) व 279/7 (0.0290 हे.) – अखिलेश, राहुल देव, शालिनी, श्वेता और सावित्री कश्यप
खसरा नं. 279/39 (0.610 हे.) व 279/41 (0.0280 हे.) – उमेश कश्यप
खसरा नं. 279/40 (0.600 हे.) व 279/42 (0.0280 हे.) – नीलम कश्यप
भाजपा नेताओं की मौजूदगी पर सवाल ?
सीमांकन स्थल पर भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं की सक्रिय मौजूदगी ने प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वास्तविक भूमि स्वामी मौके पर नहीं थे, लेकिन राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों की मौजूदगी में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
‘भू-माफिया के लिए काम कर रहा प्रशासन ?’
भूमि मालिक चिमन रावलानी सहित अन्य प्रभावितों ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला जमीन हड़पने की साजिश का हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि यही रवैया रहा तो आने वाले समय में जुना बिलासपुर के कई वैध जमीन मालिकों को अपनी ही जमीन पर कब्जा साबित करना पड़ेगा।
बिना सूचना, बिना सहमति कार्रवाई न पंचनामा बना..
पीड़ितों के अनुसार 2 जनवरी को राजस्व निरीक्षक परमेश्वर साहू और उनकी टीम ने सीमांकन शुरू किया, लेकिन सभी वैध भूमि स्वामियों को न तो पूर्व सूचना दी गई और न ही मौके पर बुलाया गया। चयनित पक्षों की मौजूदगी में ही पूरी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। वहीं राजस्व टीम ने सीमांकन तो किया पर मौके पर ना तो कोई पंचनामा तैयार किया गया ना ही सीमांकन के लिए बुलाए गए जमीन मालिकों से कोई हस्ताक्षर करवाए गए। बस टेप जमीन पर रख सीमांकन प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
आंदोलन और कानूनी लड़ाई की चेतावनी
प्रभावित पक्षों ने स्पष्ट किया है कि यदि निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी पुनःसीमांकन नहीं कराया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे, कमिश्नर व राज्य शासन से शिकायत करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी लेंगे।करबला का यह सीमांकन विवाद अब केवल राजस्व मामला नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संरक्षण, भू-माफिया और प्रशासन की कथित मिलीभगत का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।
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