बिलासपुर // रिपब्लिक भारत के एडिटर अर्णब गोस्वामी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ में एफ आई आर दर्ज होने से भाजपा और उसके नेता बौखलाहट में बयान दे रहे है ,पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव ने कहा डॉ रमन सिंह को 15 वर्ष तक पत्रकारिता के अधिकार और संरक्षण की याद नही आ रही थी जब पूरे छत्तीसगढ़ में पत्रकारों के साथ बदसलूकी, मारपीट और उनकी हत्याएं की जा रही थी ।
डॉ रमन सिंह और भाजपा को इस बात की ओर भी गौर करने की जरूरत है ,कि उनके कार्यकाल में ही बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्या ,रायपुर जिले के छुरा में पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या,जगदलपुर में पत्रकार कमल शुक्ला पर देशद्रोह की धारा लगाकर गिरफ्तार करना ,कमल शुक्ला ने जो कार्टून प्रकाशित किया था ,जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी थे,बस्तर में न जाने कितने पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया,विनोद वर्मा के साथ भाजपा की सरकार ने कैसा बर्ताव किया, डॉ रमन सिंह को इस बात की ओर विशेष ध्यान जाना चाहिए कि फरवरी 2019 में एकात्म परिसर में भाजपा की हार समीक्षा बैठक मे पत्रकार सुमन पांडेय के साथ भाजपा के गुंडों ने मारपीट की पर अफसोस डॉ रमन सिंह ने किसी घटना के लिए अखबार जगत से कभी माफी नही मांगी बल्कि एक असहाय, निर्बल,धृतराष्ट्र की तरह हाथ मसलते रहे ,तब उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ,निष्पक्षता,और चौथे स्तम्भ होने का अहसास तक नही था ।
अटल श्रीवास्तव ने कहा है कि अर्णब गोस्वामी ने पत्रकारिता जगत को शर्मसार किया है ,साथ ही एक ऐसी घटना को लेकर श्रीमती सोनिया गांधी के ऊपर गम्भीर और व्यक्तिगत आरोप लगाकर नारी समाज का अपमान किया है ,डॉ रमन सिंह को नारी सम्मान के पक्ष में खड़ा न होकर एक ऐसी घटना के पक्ष में बयान दे रहे है जो घटना की विश्वनीयता ही कटघरे में है ,रात्रि 8 .17 बजे को घटना को प्लांट किया जाता है स्वयं अर्णब गोस्वामी रात्रि 12.00 बजे की घटना बता रहा है । जबकि मेटाडेटा से स्पष्ट होता है कि घटना प्लांट किया हुआ है।
अटल श्रीवास्तव ने कहा कांग्रेस पत्रकारिता का सम्मान करती है और उनके हित की भी संरक्षण करना जानती है इसलिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने ” पत्रकार सुरक्षा कानून ” लागू करने का निर्णय लिया है ,जो पूरे देश मे इस कानून को लागू करने वाला प्रथम राज्य छत्तीसगढ़ होगा । उन्होंने ने आगे कहा कि
नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लगातार
पत्रकार असुरक्षा में जी रहे है ,बड़े बड़े पत्रकारों को जबरिया चैनल्स से निकाला जा रहा है क्योंकि वे लगातार केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार और प्रसाशनिक असफलताओ को उजागर कर रहे थे ,एक आंकड़े से ही पता चलता है कि पत्रकार कितने अवसाद और जानजोखिम में डालकर पत्रकारिता कर रहे है । 2017 पत्रकारों के लिए काला वर्ष साबित हुआ ,जिसमे 9 पत्रकारों की हत्या की जाती है जिनमे गौरी लंकेश बैंगलुरु,श्याम शर्मा इंदौर,कमलेश जैन मध्यप्रदेश,शांतनु भौमिक त्रिपुरा,के जे सिंह उत्तरप्रदेश ,सुदीप दत्ता त्रिपुरा,नवीन गुप्ता उत्तरप्रदेश,राजेश श्योराण हरियाणा, जिसके अधिकांश प्रदेश में भाजपा का शासन है । भाजपा को इस बात पर भी माफी मांगनी चाहिए कि पत्रकारों की सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीयसर्वे में 180 देशों में भारत का स्थान 142 वां है ।
अटल श्रीवास्तव ने कहा भाजपा के मुख पत्रकार के रूप में अर्णब गोस्वामी भाजपा को संरक्षित और पोषित करता रहा है ,कुछ दिन पूर्व भी कोरोना वायरस को लेकर राहुल गांधी प्रेस वार्ता को भी तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत किया था ,जिसके लिए कांग्रेस ने एफ आई आर कराया है ,अपने पत्रकार मित्र को फंसता देख भाजपा तिलमिला रही है।
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