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सरकारी जमीन… 25 फीट से ज्यादा गहरी अवैध खुदाई… और अब उसी जमीन पर ईंट भट्ठा ? आखिर खजुरी नवागांव में चल क्या रहा ? गांव के खसरा 823/1 पर उठे बड़े सवाल..

बिलासपुर, अक्टूबर, 02/026

सरकारी जमीन… 25 फीट से ज्यादा गहरी अवैध खुदाई… और अब उसी जमीन पर ईंट भट्ठा ? आखिर खजुरी नवागांव में चल क्या रहा ? गांव के खसरा 823/1 पर उठे बड़े सवाल..

बिलासपुर। शहर से लगे सकरी थाना क्षेत्र के ग्राम खजुरी नवागांव में मुरूम और चिल्फी पत्थर के कथित अवैध उत्खनन का मामला सामने आने के बाद अब इसी जमीन से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत खजुरी नवागांव के शासकीय भूमि खसरा नंबर 823/1 पर कथित रूप से ईंट भट्ठा संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि भट्ठे के संचालन के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई है।

मुरूम और चिल्फी पत्थर के अवैध उत्खनन की शिकायत और मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद खनिज विभाग, तखतपुर एसडीएम, तहसीलदार सहित टास्क फोर्स की टीम मौके पर जांच के लिए पहुंची थी। टीम ने मौके का मुआयना किया, लेकिन जांच के दौरान वहां उत्खनन करते हुए कोई मशीन या वाहन नहीं मिला। बताया जा रहा है कि खबर सामने आने के बाद कथित तौर पर उत्खनन का काम फिलहाल बंद कर दिया गया है। हालांकि खनिज विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी रखे जाने की बात कही जा रही है।

25 फीट से ज्यादा गहरी खुदाई का आरोप

जिस शासकीय भूमि पर अवैध उत्खनन के किए गए हैं, वहां बड़े पैमाने पर खुदाई कर 25 फीट से अधिक गहरे गड्ढे हों गए है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि लंबे समय से यहां मशीनों और भारी वाहनों की आवाजाही हो रही थी, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई।

अवैध उत्खनन की जांच के बीच अब उसी खसरा नंबर पर कथित ईंट भट्ठा संचालित होने की जानकारी सामने आने से मामले का दायरा और बढ़ गया है। यदि जांच में भट्ठे का संचालन बिना वैध अनुमति के पाया जाता है, तो शासकीय भूमि के उपयोग, मिट्टी के दोहन, पर्यावरणीय अनुमति, खनिज नियमों और संभावित राजस्व नुकसान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की आवश्यकता होगी।

एक ही शासकीय खसरे में दो गतिविधियां, निगरानी पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में लंबे समय से मशीनों और भारी वाहनों की आवाजाही देखी जाती रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि खसरा नंबर 823/1 में कथित रूप से मुरूम उत्खनन के साथ ईंट भट्ठे का संचालन भी हो रहा था, तो राजस्व, खनिज और अन्य संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां थी।

मामले में अब केवल खुदाई की गहराई और निकाले गए मुरूम-पत्थर की मात्रा की जांच ही पर्याप्त नहीं होगी। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि खसरा नंबर 823/1 का वास्तविक कब्जा किसके पास है, जमीन का वर्तमान उपयोग क्या है और वहां किस आधार पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

कलेक्टर के निर्देश पर जांच 

जिला कलेक्टर तक जानकारी पहुंचने के बाद उन्होंने खनिज विभाग के उप संचालक को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि खसरा नंबर 823/1 पर कथित ईंट भट्ठा कब से संचालित है, इसे कौन संचालित कर रहा है और इसके लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति, लीज या अन्य स्वीकृति मौजूद है या नहीं।

यदि ईंट भट्ठे का संचालन बिना अनुमति के पाया जाता है, तो संबंधित विभागों को भूमि के उपयोग, मिट्टी के दोहन, पर्यावरणीय प्रभाव और शासन को संभावित राजस्व नुकसान समेत सभी पहलुओं की जांच करनी होगी।

फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। मुरूम और चिल्फी पत्थर के कथित अवैध उत्खनन के साथ अब शासकीय जमीन पर कथित ईंट भट्ठे के संचालन का आरोप भी सामने आने के बाद प्रशासन की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शासकीय भूमि का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा था और इसमें नियमों का उल्लंघन भी हुआ है।

 

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Lokesh war waghmare - Founder/ Editor
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